ग्लोबल फाइनेंस और टेक्नोलॉजी मार्केट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का दबदबा तेजी से बढ़ रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, AI सेक्टर में हो रहा भारी कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) अब मार्केट से पूंजी जुटाने के मामले में दुनिया भर की सरकारों से मुकाबला कर रहा है। टेक कंपनियों और प्राइवेट इनवेस्टर्स का ध्यान बड़े पैमाने पर AI इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने पर केंद्रित है। AI Investment से जुड़ी यह जानकारी इस विषय को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
AI Investment: क्या है और क्यों महत्वपूर्ण है?
US-चीन प्रतिस्पर्धा और AI Cold War
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब सिर्फ एक टेक्नोलॉजी ट्रेंड नहीं बल्कि वैश्विक महाशक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा का मुख्य केंद्र बन चुका है। संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन के बीच ग्लोबल AI स्टैक (Global AI Stack) के निर्माण को लेकर होड़ मची हुई है। विभिन्न विश्लेषकों का मानना है कि यह प्रतिद्वंद्विता महाशक्तियों के बीच एक नए ‘AI Cold War’ को जन्म दे रही है।
चीन अपनी रणनीतिक महत्वाकांक्षाओं के तहत अमेरिकी कैपिटल पर निर्भर रहे बिना अपने AI प्रोजेक्ट्स और डोमेस्टिक टेक इकोसिस्टम की फंडिंग कर रहा है। चीन की यह रणनीति उसकी डुअल इकोनॉमी (Dual Economy) मॉडल के तहत आगे बढ़ रही है।
ग्लोबल डेवलपमेंट डिवाइड और इकोनॉमिक असर
AI में बढ़ते इस निवेश को लेकर संयुक्त राष्ट्र की संस्था UNCTAD (UN Trade and Development) ने चेतावनी जारी की है। UNCTAD के अनुसार, AI इनवेस्टमेंट बूम के कारण वैश्विक स्तर पर विकासशील और विकसित देशों के बीच डेवलपमेंट डिवाइड (विकास का अंतर) और गहरा हो सकता है।
इसके अलावा, AI capex का असर बॉन्ड मार्केट और इंटरेस्ट रेट पॉलिसीज पर भी देखने को मिल रहा है। जैक्सन होल (Jackson Hole) जैसे इकोनॉमिक फोरम में विशेषज्ञों द्वारा यह बात सामने आई है कि AI सेक्टर में आ रहा भारी निवेश केंद्रीय बैंकों के रेट निर्णय और बॉन्ड निवेशकों की रणनीतियों को प्रभावित कर रहा है।
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मूल स्रोत: Bloomberg.com