‘Made in India’ ग्लोबल मोबाइल ब्रांड्स की राह में Scale और R&D बनी बड़ी चुनौती

भारत में स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने और ‘Made-in-India’ मोबाइल फोन को एक ग्लोबल ब्रांड के रूप में स्थापित करने की महत्वाकांक्षा को बड़े पैमाने (Scale) और रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) की गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। Made in India mobile brand challenges से जुड़ी यह जानकारी इस विषय को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।

Made in India mobile brand challenges: क्या है और क्यों महत्वपूर्ण है?

ग्लोबल ब्रांड बनने की राह में स्केल और R&D की जरूरत

देश में स्वदेशी यानी होमग्रोन स्मार्टफोन ब्रांड्स को प्रमोट करने के लिए Mobile Phone Manufacturing Scheme जैसी पहलों के जरिए प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि, वैश्विक स्तर पर स्थापित ब्रांड्स से प्रतिस्पर्धा करने के लिए भारतीय कंपनियों को अपने मैन्युफैक्चरिंग स्केल को काफी बड़ा करने और R&D पर भारी निवेश करने की आवश्यकता है।

सेमीकंडक्टर और कंपोनेंट इकोसिस्टम पर जोर

इलेक्ट्रॉनिक्स और स्मार्टफोन सेक्टर में ग्लोबल कॉम्पिटिटिवनेस हासिल करने के लिए केवल असेंबलिंग काफी नहीं है। भारत सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अपनी महत्वाकांक्षाओं को आगे बढ़ा रहा है और वैश्विक स्तर पर मिलने वाली चुनौतियों से निपटने की तैयारी में है।

इसके साथ ही, इलेक्ट्रॉनिक्स और सप्लाई चेन इकोसिस्टम को मजबूती देने के लिए भारत 2030 तक 5,000 टन Rare Earth Magnet उत्पादन का लक्ष्य बनाकर चल रहा है, जो हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग के लिए बेहद जरूरी है।

ग्लोबल प्लेयर्स की मौजूदगी और भारत का विज़न

एक तरफ जहां घरेलू ब्रांड्स अपनी स्केल और R&D क्षमता बढ़ाने पर काम कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ वैश्विक कंपनियां भी भारत में अपनी जड़ें मजबूत कर रही हैं। Samsung जैसी दिग्गज टेक्नोलॉजी कंपनी भारत में अपने 30 साल पूरे होने पर नई इनोवेशन विज़न पेश कर रही है।

भारतीय टेक सेक्टर के लिए आने वाले समय में सबसे बड़ी परीक्षा यही होगी कि वह असेंबलिंग से आगे बढ़कर खुद की मजबूत R&D और बड़े पैमाने की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता कैसे तैयार करता है।

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मूल स्रोत: Business Standard