भारत के अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के नेतृत्व में आयोजित BRICS अंतरिक्ष एजेंसियों के प्रमुखों की बैठक, 2026 में बंगळुरू में सफलतापूर्वक समाप्त हुई। इस बैठक में भारत, ब्राज़ील, रूस, चीन और दक्षिण अफ़्रीका के अंतरिक्ष संस्थानों के प्रमुखों ने रिमोट सेंसिंग उपग्रह नेटवर्क के विस्तार और अंतरिक्ष स्थिरता पर गहन चर्चा की। BRICS space economy से जुड़ी यह जानकारी इस विषय को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
BRICS space economy: क्या है और क्यों महत्वपूर्ण है?
रिमोट सेंसिंग उपग्रह नेटवर्क का विस्तार
बैठक के दौरान, जटिल भू-स्थानिक डेटा संग्रह के लिए रिमोट सेंसिंग उपग्रहों की एक नई कंसैटेलेशन (constellation) पर सहमति बनी। यह कंसैटेलेशन वायुमंडलीय, जलवायु और कृषि निगरानी के लिए उच्च रिज़ॉल्यूशन इमेजिंग क्षमताएँ प्रदान करेगी। भारत के अंतरिक्ष मंत्री जिंदेन्द्र सिंह ने इस पहल को “BRICS Space Economy” का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बताया, जहाँ साझा डेटा प्लेटफ़ॉर्म और ओपन-एयर डेटा नीतियाँ अपनाई जाएंगी।
अंतरिक्ष स्थिरता और डेब्रीस‑फ्री मिशन
सभी प्रतिभागियों ने अंतरिक्ष कचरे (space debris) के बढ़ते खतरे पर जोर दिया। इस संदर्भ में, ISRO ने “डेब्रीस‑फ्री मिशन” की अवधारणा प्रस्तुत की, जिसमें उपग्रहों के जीवनकाल के अंत में सक्रिय रूप से उन्हें पृथ्वी पर वापस लाने के तरीके शामिल हैं। जिंदेन्द्र सिंह ने बताया कि भारत BRICS के भीतर अंतरिक्ष स्थिरता के लिए एक वैश्विक ढाँचा (global framework) स्थापित करने का प्रस्ताव रखता है, जिससे सदस्य देशों के बीच तकनीकी सहयोग और नियमों का समन्वय संभव होगा।
BRICS स्पेस काउंसिल की स्थापना
बंगळुरू में हुई चर्चा के दौरान BRICS Space Council की स्थापना के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। यह काउंसिल BRICS के सदस्य देशों के बीच अंतरिक्ष नीति, शोध एवं विकास, तथा वाणिज्यिक अवसरों को एकजुट करने के लिए एक मंच के रूप में कार्य करेगी। काउंसिल के माध्यम से, सदस्य देश रिमोट सेंसिंग उपग्रहों के डेटा साझा करने के लिए मानक प्रोटोकॉल और सुरक्षा उपायों पर सहमति बना सकेंगे।
भारत की भूमिका और वैश्विक ढाँचा
भारत ने BRICS के भीतर एक “स्पेस इकॉनमी” के निर्माण की दिशा में अपनी पहल को मजबूत किया। जिंदेन्द्र सिंह ने बताया कि भारत एक वैश्विक ढाँचे के माध्यम से नवाचार और विकास को बढ़ावा देने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को प्रोत्साहित करना चाहता है। इस ढाँचे के तहत, भारत अन्य BRICS राष्ट्रों के साथ उपग्रह निर्माण, लॉन्च सेवाएँ और डेटा प्रोसेसिंग के लिए साझेदारी करेगा।
सहयोग के भविष्य की दिशा
इस बैठक के बाद, BRICS के अंतरिक्ष एजेंसियों ने यह निर्णय लिया कि वे एक संयुक्त शोध एवं विकास कार्यक्रम शुरू करेंगे, जिसमें रिमोट सेंसिंग डेटा के लिए AI का उपयोग नहीं किया जाएगा, बल्कि अधिक पारंपरिक एल्गोरिदम और क्लाउड‑आधारित डेटा प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इसके अलावा, सदस्य देश अंतरिक्ष कचरे के प्रबंधन के लिए नई तकनीकों पर संयुक्त रूप से काम करेंगे, जैसे कि सक्रिय डेब्रीस हटाने वाले उपग्रह और स्वचालित ट्रैकिंग सिस्टम।
निष्कर्ष
बंगळुरू में BRICS अंतरिक्ष एजेंसियों के प्रमुखों की बैठक ने यह स्पष्ट किया कि अंतरिक्ष संसाधनों का साझा उपयोग और स्थिरता के प्रति प्रतिबद्धता BRICS की भविष्य की रणनीति के केंद्र में है। रिमोट सेंसिंग उपग्रह कंसैटेलेशन के विस्तार और अंतरिक्ष स्थिरता के लिए वैश्विक ढाँचे के निर्माण से, BRICS सदस्य राष्ट्र अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था को नई ऊँचाइयों पर ले जाने के लिए तैयार हैं।
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मूल स्रोत: ISRO