Google AI Overviews में अपने ब्रांड को ट्रैक करने का तरीका

डिजिटल मार्केटिंग और सर्च इंजन ऑप्टिमाइज़ेशन की दुनिया लगातार बदल रही है। आज के समय में ट्रेडिशनल सर्च रिजल्ट्स के अलावा AI-प्रेरित तकनीकें यूजर्स के अनुभव को पूरी तरह बदल रही हैं। Google AI Overviews और AI Mode ने जानकारी खोजने के तरीके और ब्रांड्स की डिस्कवरी को एक नया आयाम दिया है। ऐसे में यह समझना बेहद जरूरी हो गया है कि सर्च इंजन में आपके ब्रांड की स्थिति क्या है।

what changed: सर्च और डिस्कवरी का नया दौर

Google AI Overviews कुछ खास सर्च के लिए AI-जनरेटेड समरी प्रदान करते हैं, जो ट्रेडिशनल ऑर्गेनिक रिजल्ट्स के ऊपर दिखाई देते हैं। इनमें लिंक्स या साइटेशन्स भी शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा, AI Mode यूजर्स को Google के AI के साथ बातचीत के जरिए फॉलो-अप सवाल पूछने और विस्तृत जवाब पाने की सुविधा देता है।

Analytics Insight और Arundhati Kumar की रिपोर्ट्स के अनुसार, यह तकनीक लोगों के जानकारी खोजने और किसी ब्रांड को चुनने के तरीके को बदल रही है। जब कोई AI-जनरेटेड आंसर स्क्रीन पर आता है, तो वह यूजर को पारंपरिक ऑर्गेनिक लिस्टिंग देखने से पहले ही किसी कंपनी या ब्रांड से सीधे रूबरू करा सकता है।

traditional rank tracking की सीमाएं

पारंपरिक रैंक ट्रैकिंग केवल यह रिपोर्ट करती है कि कोई वेबसाइट किसी कीवर्ड के लिए किस पोजीशन पर रैंक कर रही है। लेकिन यह इस बात को कैप्चर नहीं करता है कि क्या कोई ब्रांड AI आंसर्स के भीतर साइटेड या मेंशन किया गया है या नहीं।

AI विजिबिलिटी ट्रेडिशनल वेबसाइट रैंकिंग से ज्यादा व्यापक हो सकती है, क्योंकि Google AI आंसर्स बनाते समय सोशल नेटवर्क्स जैसे व्यापक ऑनलाइन स्रोतों का भी उपयोग करता है। स्पेन में AI आंसर्स पर किए गए Mencoro के एक अध्ययन से पता चलता है कि Google सोशल नेटवर्क्स पर बहुत अधिक निर्भर करता है, जहाँ Instagram के 97.6% साइटेशन्स AI Overviews और AI Mode से आते हैं।

key benefits: AI ट्रैकिंग प्रक्रिया के फायदे

एक व्यवस्थित AI विजिबिलिटी ट्रैकिंग प्रक्रिया शुरू करने से कंपनियों को कई लाभ मिलते हैं:

  • यह ट्रैक करने में मदद मिलती है कि क्या कोई AI आंसर दिखाई दे रहा है या नहीं।
  • यह पता चलता है कि क्या आपकी वेबसाइट को उसमें साइट किया गया है या नहीं।
  • यह पहचानना आसान होता है कि कौन से कंपीटिटर्स मेंशन हो रहे हैं।
  • समय के साथ ब्रांड की विजिबिलिटी में होने वाले बदलावों को मापा जा सकता है।

what to monitor: कोर कीवर्ड्स और सिग्नल

एक व्यावहारिक ट्रैकिंग प्रक्रिया कोर कीवर्ड्स (जैसे प्रोडक्ट्स, सर्विसेज, ब्रांड का नाम, इंडस्ट्री से जुड़े सवाल और तुलनात्मक सर्च) से शुरू होती है। इसके बाद समय के साथ चार बुनियादी सिग्नल्स की मॉनिटरिंग करनी होती है।

क्वेरीज़ की तुलना में AI सर्च विजिबिलिटी की जानकारी को व्यवस्थित करने के लिए एक समर्पित Google AI Overview tracker काफी मददगार साबित हो सकता है, जिससे मैनुअल चेकिंग की जरूरत कम होती है।

risks or limitations: चुनौतियां और अनिश्चितताएं

भले ही AI ट्रैकिंग जरूरी हो गई है, लेकिन इसमें कुछ सीमाएं भी हैं। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि भविष्य के प्लेटफॉर्म अपडेट्स या थर्ड-पार्टी ट्रैकिंग टूल्स मैनुअल मॉनिटरिंग की जरूरतों को कितना बदल पाएंगे। इसके अलावा, AI एल्गोरिदम में होने वाले बदलावों के कारण विजिबिलिटी फ्लक्चुएट हो सकती है।

sector impact and business implications

डिजिटल मार्केटिंग, ई-कॉमर्स और ब्रांड मैनेजमेंट सेक्टर पर इसका गहरा प्रभाव पड़ रहा है। बिज़नेस लीडर्स के लिए यह जानना जरूरी हो गया है कि उनका ब्रांड AI इकोसिस्टम में कहां खड़ा है। यदि कोई ब्रांड ट्रेडिशनल SEO में आगे है, तो यह जरूरी नहीं कि वह AI Overviews में भी उतनी ही मजबूत स्थिति में हो। इसलिए मार्केटिंग बजट और स्ट्रैटेजी में बदलाव करने की आवश्यकता बढ़ गई है।

who may be affected

इस बदलाव से डिजिटल मार्केटर्स, SEO प्रोफेशनल्स, ब्रांड मैनेजर्स और ऑनलाइन बिजनेस चलाने वाले उद्यमी सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे हैं। जिन कंपनियों की ऑनलाइन विजिबिलिटी मजबूत है, उन्हें अपनी स्ट्रैटेजी को अपडेट करना होगा ताकि वे AI आंसर्स का हिस्सा बन सकें।

what to watch next

आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि Google अपने AI फीचर्स में किस तरह के अपडेट लाता है और थर्ड-पार्टी एनालिटिक्स टूल्स किस हद तक इन मैट्रिक्स को ट्रैक करने में सक्षम होते हैं। ब्रांड्स को अपनी डिजिटल प्रेजेंस को बेहतर बनाए रखने के लिए लगातार अपनी मॉनिटरिंग प्रक्रिया को अपग्रेड करते रहना होगा।