नैंसी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप जेम्स वेब से किस तरह है अलग

अंतरिक्ष अनुसंधान की दुनिया में नासा (NASA) के अभियानों ने हमेशा से वैज्ञानिकों को ब्रह्मांड के रहस्यों को गहराई से समझने में मदद की है। अंतरिक्ष विज्ञान में जब भी शक्तिशाली टेलीस्कोप की बात आती है, तो जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप का नाम सबसे ऊपर लिया जाता है। हालांकि, अब स्पेस साइंस में एक नया नाम और तकनीक चर्चा में है, जो अंतरिक्ष को देखने के हमारे नजरिए को पूरी तरह बदलने के लिए तैयार है। यह नया टेलीस्कोप है—नैंसी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप।

वर्तमान में नैंसी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप अपने सर्विस स्टेशन की ओर बढ़ रहा है, जो पृथ्वी से लगभग 930,000 मील की दूरी पर स्थित है। दिलचस्प बात यह है कि पहले से ही कार्यरत जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप अंतरिक्ष में इसी स्थान पर मौजूद है। दोनों टेलीस्कोप पृथ्वी के लग्रांज पॉइंट 2 (L2) पर ऑपरेट करते हैं, लेकिन इनकी डिजाइन, क्षमताएं और काम करने का तरीका एक-दूसरे से काफी अलग है। आइए विस्तार से जानते हैं कि क्या चीजें इन दोनों टेलीस्कोप को एक-दूसरे से अलग बनाती हैं।

क्या बदला है और क्या हैं मुख्य तकनीकी अंतर

जेम्स वेब और नैंसी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप दोनों ही अंतरिक्ष के गहरे रहस्यों को खंगालने के लिए बनाए गए हैं, लेकिन दोनों के ऑप्टिकल सिस्टम और विजन में जमीन-आसमान का फर्क है।

सबसे बड़ा अंतर इनके फील्ड ऑफ व्यू यानी दृष्टि क्षेत्र (field of view) और रिजॉल्यूशन में है। जहां जेम्स वेब का फील्ड ऑफ व्यू संकरा (narrower) है और वह उच्च रिजॉल्यूशन (higher resolution) पर काम करता है, वहीं रोमन टेलीस्कोप का फील्ड ऑफ व्यू बहुत चौड़ा (wide field of view) है। इस चौड़े विजन के कारण रोमन एक ही बार में आसमान के बहुत बड़े हिस्सों को कैप्चर करने की क्षमता रखता है।

मिरर डिजाइन और साइज में अंतर

टेलीस्कोप की क्षमता उसके प्राइमरी मिरर पर बहुत हद तक निर्भर करती है। जेम्स वेब का प्राइमरी मिरर 18 हेक्सागोनल (षट्कोणीय) सेगमेंट से मिलकर बना है, जो आपस में जुड़कर एक गोलाकार आकृति बनाते हैं। इसका व्यास (diameter) 21.3 फीट है, जो इसे अंतरिक्ष में स्थापित अब तक का सबसे बड़ा मिरर बनाता है।

इसके विपरीत, नैंसी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप का मिरर एक विशाल सिंगल सेगमेंट से बना है। इसका व्यास 7.9 फीट है, जो कि हबल टेलीस्कोप के आकार के बराबर है, लेकिन इसका वजन हबल के मिरर से एक चौथाई ही है।

ऑपरेटिंग तापमान और सेंसर तकनीक

अंतरिक्ष में इन्फ्रारेड तकनीक का उपयोग करने के लिए तापमान को नियंत्रित रखना बेहद जरूरी होता है।

  • जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप: इसके मिरर सेगमेंट की गर्मी से इन्फ्रारेड लाइट में कोई बाधा न आए, इसलिए जेम्स वेब को -364 डिग्री फारेनहाइट तापमान पर ठंडा रखा जाता है। इसके नियर-इन्फ्रारेड NIRCam में आठ 2,048 x 2,048 पिक्सल सेंसर लगे हैं, जिनका फील्ड ऑफ व्यू 260×130 आर्कसेकंड है।
  • रोमन स्पेस टेलीस्कोप: यह टेलीस्कोप -288 डिग्री फारेनहाइट तापमान पर ऑपरेट करता है। इसके वाइड-फील्ड इंस्ट्रूमेंट (WFI) में 4,096 x 4,096 पिक्सल वाले 18 सेंसर दिए गए हैं, और इसका फील्ड ऑफ व्यू 2700×1280 आर्कसेकंड है।

कोरोनाग्राफ इंस्ट्रूमेंट की खासियत

रोमन टेलीस्कोप की एक और बड़ी तकनीकी विशेषता इसका ऑनबोर्ड कोरोनाग्राफ इंस्ट्रूमेंट (Coronagraph Instrument) है। इसमें फ्लेक्सिबल या ‘डिफॉर्मेबल’ मिरर लगे हैं, जो कई तरह के मास्क और प्रिज्म का उपयोग करते हैं। यह सिस्टम किसी तारे के अत्यधिक तेज प्रकाश को ब्लॉक करने का काम करता है, जिससे वैज्ञानिक उसके आसपास मौजूद ग्रहों को और अधिक स्पष्टता और डिटेल के साथ देख पाते हैं।

इस कोरोनाग्राफ के मिरर इतनी सटीकता के साथ खुद को रीशेप (आकार बदल) सकते हैं कि वे डीएनए के एक स्ट्रैंड की चौड़ाई जितनी बारीक त्रुटि को भी संतुलित कर सकते हैं।

सेक्टर इंपैक्ट और बिजनेस व रिसर्च इम्प्लिकेशंस

इन दोनों टेलीस्कोप के अंतरिक्ष में साथ होने से खगोल विज्ञान और एयरोस्पेस सेक्टर पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। वैज्ञानिक समुदाय का अनुमान है कि रोमन स्पेस टेलीस्कोप अपने चौड़े फील्ड ऑफ व्यू की मदद से अरबों ऐसे नए तारों की खोज करेगा जिन्हें पहले कभी नहीं देखा गया है।

इस मिशन की एक और दिलचस्प रणनीति यह है कि जब रोमन अपनी वाइड-फील्ड तकनीक से किसी नई और रोमांचक चीज की खोज करेगा, तो नासा बाद में जेम्स वेब को उस विशिष्ट स्थान पर भेजकर उसका बारीकी से निरीक्षण और अध्ययन करवाएगा। इस तरह, दोनों टेलीस्कोप एक-दूसरे के पूरक (complementary) के रूप में काम करेंगे।

सीमाएं, अनिश्चितताएं और आगे क्या देखना है

किसी भी बड़े स्पेस मिशन की तरह, इसके समय और संचालन में कुछ अनिश्चितताएं जुड़ी हुई हैं। शेड्यूल के अनुसार, नैंसी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप के अपने गंतव्य (L2 पॉइंट) पर साल के अंत तक या अगले साल की शुरुआत (late 2026 या early 2027) में पहुंचने की उम्मीद जताई गई है। अक्टूबर 11, 2026 की समयसीमा से जुड़े अपडेट्स पर भी वैज्ञानिकों की नजर है।

आने वाले समय में जब रोमन पूरी तरह से एक्टिव हो जाएगा, तो यह देखना दिलचस्प होगा कि यह अरबों नए तारों और एक्सोप्लैनेट्स के डेटा को किस तरह पृथ्वी तक भेजता है और जेम्स वेब के साथ मिलकर अंतरिक्ष विज्ञान के कौन से नए पन्ने खोलता है।