मध्य पूर्व में हाल ही में भड़की हिंसा और संघर्ष ने वैश्विक बाजारों में नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। यमन के हूती आंदोलन और सऊदी अरब के बीच चल रहे तनाव के बीच इस संघर्ष के गहराने से वैश्विक अर्थव्यवस्था और विशेष रूप से ऊर्जा बाजारों पर इसके असर का आकलन किया जाने लगा है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच निवेशक और अर्थशास्त्री इस बात पर बारीकी से नजर रख रहे हैं कि इसका असर आने वाले दिनों में महंगाई (inflation) और केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर किस प्रकार पड़ेगा।
क्या बदला है?
वर्ष 2022 के संघर्ष विराम के बाद, पिछले कुछ हफ्तों में यमन के ईरान-समर्थित हूती आंदोलन और सऊदी अरब के बीच की लड़ाई में अचानक तेजी आई है। इस बीच, रविवार को ईरान समर्थित हूती मिलिशिया ने सऊदी राजधानी के एयरपोर्ट पर एक हमला किया। इस हमले के बाद स्थिति काफी संवेदनशील हो गई है। द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, फारस की खाड़ी (Gulf of Hormuz) के रास्ते होने वाले ऑयल एक्सपोर्ट्स उन स्तरों के करीब पहुंच गए थे जो अमेरिका और इजराइल द्वारा 28 फरवरी को ईरान पर हमले से पहले देखे गए थे। हालांकि, इस ताज़ा सैन्य घटनाक्रम ने आपूर्ति श्रृंखला (supply chain) को लेकर फिर से अनिश्चितता खड़ी कर दी है।
मुख्य लाभ और बाजार की स्थिति
वर्तमान स्थिति में रिफाइनरियों की कार्यप्रणाली लगभग पूरी क्षमता के साथ चल रही है, जिसके चलते किसी भी तरह की रुकावट आने पर गैसोलीन और डीजल की त्वरित आपूर्ति में कमी का खतरा मंडरा रहा है। सितंबर के मध्य में डीजल की कीमतें अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद थोड़ी नीचे जरूर आईं, लेकिन वे अभी भी ऐतिहासिक रूप से ऊंचे स्तर के करीब बनी हुई हैं। ऊर्जा लागत में यह उछाल उन प्रमुख कारकों में से एक माना जा रहा है जिसके कारण बुधवार को आने वाली कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) रिपोर्ट में महंगाई बढ़ने का अनुमान जताया जा रहा है।
आर्थिक और व्यावसायिक प्रभाव
बुधवार को आने वाली कंज्यूमर इन्फ्लेशन रिपोर्ट के लिए आम सहमति का अनुमान है कि सितंबर में हेडलाइन CPI इन्फ्लेशन साल-दर-साल 3.6% बढ़ सकती है, जो मई के 4.2% के शिखर से नीचे है। वहीं, खाद्य और ऊर्जा को छोड़कर कोर CPI सितंबर में साल-दर-साल 2.5% बढ़ने का अनुमान है, जो अगस्त के 2.4% की वृद्धि से थोड़ा अधिक है।
ऊंचे डीजल और ऊर्जा भावों के कारण परिवहन लागत (transportation costs) में वृद्धि होने की आशंका है, जिससे व्यापक स्तर पर विभिन्न प्रकार के गुड्स और सर्विसेज की कीमतें प्रभावित हो सकती हैं। निवेशकों का मानना है कि यदि CPI के आंकड़े अनुमान से अधिक रहते हैं, तो बाजार में यह धारणा फिर से मजबूत हो सकती है कि महंगाई उम्मीद से अधिक जिद्दी साबित हो रही है और ब्याज दरें (interest rates) लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती हैं।
कौन हो सकता है प्रभावित?
इस भू-राजनीतिक तनाव और वित्तीय अनिश्चितता का असर सीधे तौर पर ग्लोबल मार्केट, एनर्जी इन्वेस्टर्स और उन देशों पर पड़ेगा जो तेल आयात पर निर्भर हैं। अमेरिका में, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि रियाजुद्दीन एयरपोर्ट पर हमले के बाद अमेरिका, तेहरान समर्थित हूती बलों के खिलाफ सऊदी अरब की जवाबी कार्रवाई में शामिल हो सकता है। राष्ट्रपति ट्रम्प ने अपने बयान में कहा, “हम इस पर विचार कर सकते हैं। हमें हालिया हमले के बारे में अभी पता चला है। इसलिए, हम निर्णय लेंगे। हम बहुत तेजी से कदम उठाते हैं।”
वित्तीय बाजारों में इसके स्पष्ट संकेत मिलने लगे हैं। फेड फंड्स फ्यूचर्स के अनुसार, पिछले महीने एक चौथाई अंक (1/4-пойнт) की बढ़ोतरी के बाद 28 अक्टूबर को होने वाली पॉलिसी मीटिंग में फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) द्वारा अपनी टारगेट रेंज को अपरिवर्तित रखने की संभावना लगभग 81% आंकी जा रही है। इसके साथ ही, नीति-संवेदनशील अमेरिकी 2-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड शुक्रवार को 4.80% पर बंद हुई।
जोखिम और सीमाएं
हालांकि बाजार के जानकारों और निवेशकों ने बॉन्ड यील्ड में कुछ स्थिरता देखी है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि यह सकारात्मक रुख कब तक टिक पाएगा। बॉन्ड यील्ड का यह रुझान निकट भविष्य के उत्प्रेरकों (catalysts) जैसे कि मिडिल ईस्ट के घटनाक्रम और बुधवार की CPI रिपोर्ट पर निर्भर करता है। इसके अलावा, यह अभी पूरी तरह तय नहीं है कि संघर्ष में हो रहे ये बदलाव फेडरल रिजर्व को 28 अक्टूबर की अपनी बैठक में ब्याज दरें बढ़ाने के लिए मजबूर करेंगे या नहीं।
आगे क्या देखना चाहिए?
आने वाले दिनों में निवेशकों और विश्लेषकों की निगाहें मुख्य रूप से तीन बातों पर टिकी होंगी: पहला, मिडिल ईस्ट में सुरक्षा हालात और सऊदी-हूती संघर्ष का अगला रुख; दूसरा, बुधवार को जारी होने वाले उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आधिकारिक आंकड़े; और तीसरा, अमेरिकी प्रशासन और वैश्विक सहयोगियों की रणनीतिक प्रतिक्रिया। ऊर्जा आपूर्ति में किसी भी प्रकार की नई बाधा वैश्विक वित्तीय बाजारों और महंगाई के आंकड़ों पर तत्काल प्रभाव डाल सकती है, जिससे टेक और बिजनेस सेक्टर दोनों को सतर्क रहना होगा।
