हाइड्रोजन ब्लेंड: लोहे के उत्पादन में उत्सर्जन घटाने का नया रास्ता
फ़िनलैंड की Åbo Akademi University के शोधकर्ताओं ने Fuel जर्नल में प्रकाशित एक सिमुलेशन के आधार पर यह दिखाया है कि हाइड्रोजन‑मेथेन मिश्रण (hydrogen blend) को धीरे‑धीरे बढ़ाने से सीधे लोहे के उत्पादन (direct ironmaking) में CO₂ उत्सर्जन लगभग दो‑तिहाई (≈ 66.7 %) तक घट सकता है, जबकि आयरन की गुणवत्ता 90 % से ऊपर बनी रहती है। यह निष्कर्ष उन स्टील निर्माताओं के लिए महत्वपूर्ण है जो जलवायु लक्ष्य हासिल करने के लिए अपने उत्पादन प्रक्रिया को डी‑कार्बनाइज़ करने की कोशिश कर रहे हैं।
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सिमुलेशन का मुख्य निष्कर्ष
उत्सर्जन में दो‑तिहाई की संभावित कमी
सिमुलेशन ने दिखाया कि जब ताज़ा फीड में हाइड्रोजन‑और‑मेथेन (hydrogen‑and‑methane) का अनुपात 10 % से 90 % तक बढ़ाया जाता है, तो सीधे लोहे के उत्पादन प्रणाली से निकलने वाले CO₂ उत्सर्जन में लगभग दो‑तिहाई की कमी आती है। यह कमी केवल उस चरण में लागू होती है जहाँ आयरन ऑर (iron ore) को डाइरेक्ट रिड्यूस्ड आयरन (DRI) में बदलते हैं; हाइड्रोजन उत्पादन की स्वयं की उत्सर्जन को इस गणना में शामिल नहीं किया गया है।
लोहे की गुणवत्ता पर प्रभाव
परिणामस्वरूप प्राप्त आयरन की metallization (धातुकरण) 90 % से अधिक बनी रहती है। Midrex के अनुसार, metallization आयरन की कुल मात्रा का प्रतिशत दर्शाता है, न कि उत्पाद में मौजूद सभी आयरन का। इस स्तर की गुणवत्ता को बनाए रखते हुए उत्सर्जन में इतनी बड़ी कमी हासिल करना तकनीकी रूप से आशाजनक माना गया है।
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हाइड्रोजन‑मेथेन मिश्रण का कार्य‑प्रणाली
ताज़ा फीड में हाइड्रोजन का बढ़ता अनुपात
पर्यवेक्षण में यह देखा गया कि फीड में हाइड्रोजन की हिस्सेदारी को 10 % से 90 % तक ले जाने से शाफ्ट फर्नेस (shaft furnace) के अंदर हाइड्रोजन‑रिच गैस की उपलब्धता बढ़ती है। इस गैस में हाइड्रोजन और कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) दोनों होते हैं, जो आयरन ऑर से ऑक्सीजन को हटाकर पानी (H₂O) बनाते हैं। इस प्रक्रिया में हाइड्रोजन का मुख्य कार्य ऑक्सीजन को हटाना है, जिससे आयरन का रिडक्शन होता है।
गैस रिफॉर्मर और रीसाइक्लिंग गैस की भूमिका
सिमुलेशन में फर्नेस के साथ एक गैस रिफॉर्मर (gas reformer) भी मॉडल किया गया, जो मीथेन और भाप को हाइड्रोजन‑रिच गैस में बदलता है। साथ ही, फर्नेस से निकलने वाली रीसाइक्लिंग गैस को पुनः फीड में मिलाने से आयरन रिडक्शन की दक्षता बढ़ती है। हालांकि, रीसाइक्लिंग गैस को अधिक उपयोग करने से रिफॉर्मर में मीथेन के परिवर्तन की दर घट सकती है, जिससे कुल मीथेन उपयोग में कमी आ सकती है। यह संतुलन व्यावहारिक रूप से अभी भी औद्योगिक मूल्यांकन की आवश्यकता रखता है।
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आर्थिक और व्यावसायिक पहलू
उत्पादन लागत में वृद्धि
International Energy Agency (IEA) के 2025 के आकलन के अनुसार, पूरी तरह हाइड्रोजन‑आधारित डाइरेक्ट रिड्यूस्ड आयरन (DRI) प्लांट की उत्पादन लागत पारंपरिक ब्लास्ट फर्नेस‑आधारित प्लांट की तुलना में 50 % से 140 % अधिक हो सकती है। यह अनुमान 2024 की ऊर्जा कीमतों पर आधारित है और इसमें कोई सब्सिडी या कार्बन‑प्राइसिंग समर्थन नहीं माना गया है।
प्रोजेक्ट की समय‑सीमा और अनिश्चितताएँ
IEA ने बताया कि कई नज़दीकी‑शून्य‑उत्सर्जन (near‑zero‑emissions) आयरन उत्पादन प्रोजेक्ट पहले प्राकृतिक गैस (natural gas) के साथ शुरू होने की योजना बना रहे हैं, और हाइड्रोजन पर पूरी तरह स्विच करने की स्पष्ट समय‑सीमा अभी तय नहीं हुई है। इस कारण, उद्योग को यह तय करना होगा कि हाइड्रोजन कब किफ़ायती होगा और क्या ग्राहक हाइड्रोजन‑आधारित स्टील खरीदने के लिए तैयार हैं।
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पर्यावरणीय प्रभाव और सीमाएँ
हाइड्रोजन उत्पादन का कार्बन फुटप्रिंट
हाइड्रोजन की स्वयं की उत्पादन प्रक्रिया का कार्बन फुटप्रिंट इस सिमुलेशन में नहीं जोड़ा गया है। यदि हाइड्रोजन ‘ग्रीन हाइड्रोजन’ (renewable electricity से जल विभाजन) के रूप में उत्पन्न किया जाता है, तो अतिरिक्त ऊर्जा की आवश्यकता और उत्पादन उपकरण की संचालन लागत दोनों ही महंगे हो सकते हैं। इस कारण, हाइड्रोजन‑आधारित लोहे के उत्पादन की कुल पर्यावरणीय लाभ को पूरी तरह समझने के लिए हाइड्रोजन उत्पादन की ऊर्जा स्रोत और लागत दोनों को देखना आवश्यक है।
सिमुलेशन की सीमाएँ और व्यावहारिक चुनौतियाँ
फ़िनलैंड के मॉडल ने वास्तविक प्लांट डेटा के साथ व्यक्तिगत मॉडलों की जाँच की है, लेकिन यह अभी तक किसी व्यावसायिक प्लांट में दो‑तिहाई की बचत को सिद्ध नहीं करता। अध्ययन ने यह भी कहा है कि प्रस्तावित हाइड्रोजन‑रिच ऑपरेटिंग कंडीशन को औद्योगिक स्तर पर अभी मूल्यांकन की जरूरत है। इसके अलावा, हाइड्रोजन की कीमत, उपलब्धता और ग्राहक की मांग जैसी आर्थिक कारक अभी भी अनिश्चित हैं।
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भविष्य की दिशा और देखना चाहिए
नीति, सब्सिडी और कार्बन प्राइसिंग
उत्पादन लागत में 50 %‑140 % की वृद्धि को कम करने के लिए सरकारों को सब्सिडी, कर रियायत या कार्बन प्राइसिंग जैसे प्रोत्साहन प्रदान करने की आवश्यकता हो सकती है। IEA ने इस बात पर प्रकाश डाला है कि मौजूदा लागत अनुमान 2024 की ऊर्जा कीमतों पर आधारित हैं, इसलिए भविष्य में नवीकरणीय ऊर्जा की कीमत घटने पर हाइड्रोजन‑आधारित प्रक्रिया अधिक प्रतिस्पर्धी हो सकती है।
उद्योग की तैयारी और बाजार की मांग
स्टील निर्माताओं को यह तय करना होगा कि कब हाइड्रोजन‑आधारित DRI तकनीक को अपनाया जाए, और क्या उनके ग्राहक हाइड्रोजन‑आधारित स्टील को प्रीमियम कीमत पर खरीदने को तैयार हैं। यदि बड़े ऑटोमोटिव या निर्माण कंपनियां कम‑कार्बन स्टील की मांग बढ़ाते हैं, तो हाइड्रोजन ब्लेंड (hydrogen blend) की ओर संक्रमण तेज़ हो सकता है।
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निष्कर्ष
फ़िनलैंड के सिमुलेशन ने दिखाया है कि हाइड्रोजन‑मेथेन मिश्रण को 10 % से 90 % तक बढ़ाने से सीधे लोहे के उत्पादन में CO₂ उत्सर्जन दो‑तिहाई तक घट सकता है, जबकि आयरन की गुणवत्ता 90 % से ऊपर बनी रहती है। हालांकि, इस तकनीक को व्यावसायिक रूप से लागू करने में उत्पादन लागत, हाइड्रोजन की उपलब्धता, और नीति समर्थन जैसी कई चुनौतियाँ हैं। उद्योग को इन चुनौतियों को समझते हुए चरणबद्ध रूप से हाइड्रोजन को अपनाना होगा, और साथ ही हाइड्रोजन उत्पादन की स्वयं की कार्बन फुटप्रिंट को भी कम करने के उपाय खोजने होंगे।
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स्रोत: Åbo Akademi University अध्ययन (Fuel, 3 March 2026; 15 September 2026), International Energy Agency 2025 आकलन, Market Business News (12 Oct 2026, 13 Oct 2026).
