AKASA ने पेश किया Autonomous Mid-Cycle AI: इनपेशेंट मेडिकल कोडिंग और CDI प्रक्रिया में बड़ा बदलाव

AKASA का नया कदम: रेवेन्यू साइकिल मैनेजमेंट में ऑटोमेशन

हेल्थकेयर ऑपरेशंस और रेवेन्यू साइकिल टेक्नोलॉजी से जुड़ी कंपनी AKASA ने अस्पतालों के इनपेशेंट डिपार्टमेंट के लिए अपना नया प्लेटफॉर्म कमर्शियल तौर पर पेश किया है। कंपनी ने इनपेशेंट मेडिकल कोडिंग और क्लिनिकल डॉक्यूमेंटेशन इंटीग्रिटी (CDI) के लिए Autonomous Mid-Cycle AI सॉल्यूशन को आधिकारिक तौर पर रोल आउट किया है। यह नया सिस्टम अस्पतालों में मरीज के डिस्चार्ज होने के बाद होने वाली पूरी कोडिंग प्रक्रिया को बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के ऑटोमेट करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

हेल्थकेयर एडमिनिस्ट्रेशन में रेवेन्यू साइकिल का ‘मिड-साइकिल’ (Mid-cycle) वह चरण माना जाता है, जहां मरीज के इलाज से जुड़े क्लिनिकल चार्ट्स, डॉक्टर के नोट्स और मेडिकल रिपोर्ट्स को बिलिंग कोड्स में बदला जाता है। AKASA का दावा है कि उसका यह प्लेटफॉर्म एक्यूट केयर ऑपरेशंस की सबसे जटिल बाधाओं को दूर करता है और हॉस्पिटल्स के अकाउंट्स रिसीवेबल (A/R) दिनों की संख्या को बड़े पैमाने पर कम करने की क्षमता रखता है।

पारंपरिक कोडिंग बनाम AI सिस्टम: 90 सेकंड में पूरा काम

अस्पतालों में अब तक इनपेशेंट मेडिकल कोडिंग पूरी तरह से ह्यूमन कोडर टीमों पर निर्भर रही है। इस पारंपरिक प्रक्रिया में कई परिचालन चुनौतियां और देरी देखने को मिलती रही हैं:

  • समय की खपत: एक इनपेशेंट चार्ट को मैन्युअली रिव्यू और कोड करने में सामान्यतः 30 to 60 minutes का समय लगता है।
  • डिस्चार्ज के बाद की पेंडेंसी: डिस्चार्ज होने के बाद मरीज के मेडिकल अकाउंट्स अक्सर 3 to 4 days तक अनरिव्यूड (बिना जांचे) पड़े रहते हैं।
  • AI की रफ्तार: AKASA का नया प्लेटफॉर्म मरीज के डिस्चार्ज होने के महज Under 90 seconds के भीतर इनपेशेंट एनकाउंटर्स की एंड-टू-एंड ऑटोनॉमस कोडिंग पूरी कर देता है।

कंपनी के अनुसार, यह इंजन चार्ट लेवल पर ही बिलिंग संबंधी विसंगतियों और गलतियों को पकड़ लेता है, जिससे क्लेम डेटा क्लीयरिंगहाउस या पेयर एडजुडिकेशन इंजन तक पहुंचने से पहले ही पूरी तरह दुरुस्त हो जाता है।

थर्ड-पार्टी टेस्टिंग और एक्यूरेसी के आंकड़े

AKASA के इस सिस्टम को लेकर स्वतंत्र थर्ड-पार्टी, ब्लाइंडेड इवैल्यूएशन किए गए हैं। इन टेस्ट्स में किसी भी अस्पताल के कुल इनपेशेंट वॉल्यूम के 65% to 85% हिस्से का प्रतिनिधित्व करने वाले इनपेशेंट एनकाउंटर्स का विश्लेषण किया गया।

इस ब्लाइंडेड टेस्टिंग के परिणामों से स्पष्ट हुआ कि AI प्लेटफॉर्म ने कई प्रमुख मेट्रिक्स पर मानव कोडर्स के प्रदर्शन की बराबरी की या उनसे बेहतर परिणाम दिए:

  • MS-DRG असाइनमेंट: मेडिकेयर सीवेरिटी डायग्नोसिस-रिलेटेड ग्रुप्स (MS-DRG) के निर्धारण में AI का प्रदर्शन सटीक रहा।
  • प्रिंसिपल डायग्नोसिस चयन: मुख्य बीमारी या स्थिति की सही पहचान और कोडिंग में सिस्टम ने उच्च सटीकता दर्ज की।
  • POA इंडिकेटर कैप्चर: प्रेजेंट-ऑन-एडमिशन (POA) इंडिकेटर्स को दर्ज करने में यह प्रणाली सफल रही।
  • क्वालिटी और सीवेरिटी डॉक्यूमेंटेशन: मरीज की बीमारी की गंभीरता (Severity of Illness) और क्वालिटी डॉक्यूमेंटेशन कैप्चर के मामलों में भी AI ने इंसानी कोडिंग के बराबर या उससे बेहतर स्तर दिखाया।

कस्टम-ट्यून्ड जेनरेटिव मॉडल्स की तकनीकी बनावट

AKASA का प्लेटफॉर्म सामान्य ऑफ-द-शेल्फ एल्गोरिदम पर काम करने के बजाय कस्टम-ट्यून्ड जेनरेटिव मॉडल्स (custom-tuned generative models) का उपयोग करता है। कंपनी ने इस सॉफ्टवेयर को प्रत्येक हेल्थ सिस्टम की विशिष्ट परिचालन परिस्थितियों के अनुसार ढाला है।

स्थानीय डेटा और क्लिनिकल पैटर्न्स पर आधारित ट्रेनिंग

हर अस्पताल का काम करने का तरीका और मरीजों का प्रोफाइल अलग होता है। इसी वजह से यह सिस्टम निम्नलिखित मापदंडों पर पर्सनलाइज किया जाता है:

  • हिस्टोरिकल केस-मिक्स इंडेक्स (CMI): संबंधित हेल्थकेयर संस्थान के पुराने मरीज डेटा और जटिलता का रिकॉर्ड।
  • लोकल क्लिनिकल क्राइटेरिया: अस्पताल के अंदरूनी चिकित्सा मानक और प्रोटोकॉल।
  • डॉक्यूमेंटेशन पैटर्न्स: डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ द्वारा नोट्स लिखने की विशिष्ट आदतें और फॉर्मेट।
  • स्पेशियल्टी बारीकियां (Nuances): विभिन्न क्लिनिकल विभागों की विशेष आवश्यकताएं।

कंपनी का दावा है कि उसका सिस्टम सभी क्लिनिकल स्पेशियल्टीज में एक्यूट और मल्टी-मॉर्बिड (एक साथ कई गंभीर बीमारियों से ग्रस्त) इनपेशेंट स्टे को बिना किसी इंसानी मदद के पूरी तरह से कोड करने में सक्षम है।

हेल्थकेयर बाजार और AKASA की मौजूदा पहुंच

AKASA के अनुसार, उसके द्वारा प्रोसेस किए जाने वाले इनपेशेंट वॉल्यूम में सालाना आधार पर Nearly 6x की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। इसके अलावा, कंपनी का मौजूदा क्लाइंट बेस 180 अरब डॉलर (More than $180 billion) से अधिक के एग्रीगेट नेट पेशेंट रेवेन्यू (NPR) का प्रतिनिधित्व करता है।

वर्तमान में AKASA के मॉडल्स अमेरिका के अस्पतालों से होने वाले कुल इनपेशेंट डिस्चार्ज में से लगभग 1 in every 10 डिस्चार्ज से जुड़े एनकाउंटर्स को प्रोसेस कर रहे हैं। यह आंकड़ा अमेरिकी एक्यूट केयर सिस्टम में कंपनी के व्यापक प्रभाव को रेखांकित करता है।

इंडस्ट्री का रुख और निवेश में उछाल

हेल्थकेयर रेवेन्यू साइकिल मैनेजमेंट में ऑटोमेशन की मांग तेजी से बढ़ रही है। इन्वेस्टमेंट बैंकिंग फर्म Capstone Partners की सितंबर 2026 (September 2026) की रिपोर्ट के अनुसार, ऑटोनॉमस कोडिंग और बिलिंग पर होने वाले कुल खर्च में भारी बढ़ोतरी देखी गई है।

रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष बताते हैं:

  • ऑटोनॉमस कोडिंग और बिलिंग पर खर्च सालाना आधार पर 125% बढ़ा है।
  • इस सेक्टर का कुल खर्च अब बढ़कर 450 मिलियन डॉलर ($450 million) तक पहुंच चुका है।

उद्योग के विश्लेषकों का मानना है कि वर्कफोर्स की कमी और अस्पतालों पर बढ़ते वित्तीय दबाव के कारण हेल्थ सिस्टम्स ऐसे ऑटोमेशन टूल्स की ओर रुख कर रहे हैं जो त्रुटियों को घटाकर क्लेम प्रोसेसिंग को तेज कर सकें।

शुरुआती ग्राहक और हेल्थ सिस्टम्स की प्रतिक्रिया

AKASA के इस नए सॉल्यूशन और उससे जुड़ी तकनीकों को प्रमुख हेल्थ सिस्टम्स द्वारा अपनाया जा रहा है:

  • Cleveland Clinic: इस प्रमुख हेल्थ सिस्टम ने AKASA के प्रीबिल रिव्यू (prebill review) टूल को डिप्लॉय किया है और वह अब कंपनी के ऑटोनॉमस मिड-साइकिल सॉल्यूशंस की संभावनाओं का परीक्षण कर रहा है।
  • Nebraska Methodist Health System: इस संस्थान को भी इस तकनीक के शुरुआती अपनाने वालों (early adopters) में शामिल किया गया है।

इस कमर्शियल लॉन्च के महत्व को रेखांकित करते हुए आधिकारिक बयान में कहा गया: “The incredible demand for healthcare is finally being addressed by advancements in AI. Multiple parts of the healthcare ecosystem will need to scale up, with documentation and coding being critical components.”

इसके साथ ही मिड-साइकिल ऑटोमेशन के ऐतिहासिक संदर्भ पर जोर देते हुए कहा गया: “For years, an autonomous mid-cycle has been a holy grail in our industry. Today, AKASA is making it real.”

व्यावसायिक प्रभाव और आगे की दिशा

अस्पतालों के फाइनेंस और बिलिंग ऑपरेशंस के लिए मिड-साइकिल में 90 सेकंड के भीतर कोडिंग का पूरा होना एक बड़ा वित्तीय बदलाव ला सकता है। डिस्चार्ज और बिलिंग के बीच 3 से 4 दिनों का अंतराल खत्म होने से कैश फ्लो में सुधार होने की उम्मीद है। साथ ही, चार्ट लेवल पर विसंगतियों को रोकने से इंश्योरेंस कंपनियों (पेयर्स) द्वारा क्लेम खारिज किए जाने की घटनाओं में कमी आ सकती है।

सीमाएं और भविष्य की योजनाएं

हालांकि यह तकनीक इनपेशेंट सेगमेंट के लिए पूरी तरह लाइव हो चुकी है, लेकिन कुछ पहलू अभी भी विकास के अधीन हैं:

  • आउटपेशेंट एनकाउंटर्स: आउटपेशेंट फैसिलिटी एनकाउंटर ऑटोमेशन की रिलीज के बारे में सिर्फ इतना बताया गया है कि यह ‘जल्द ही पेश’ की जाएगी; इसकी कोई पक्की समयसीमा या तारीख घोषित नहीं की गई है।
  • थर्ड-पार्टी टेस्टिंग का विवरण: जिन स्वतंत्र संस्थाओं ने 65% से 85% इनपेशेंट वॉल्यूम पर ब्लाइंडेड तुलनात्मक परीक्षण किए थे, उनके विशिष्ट नामों का खुलासा रिपोर्ट में नहीं किया गया है।

हेल्थकेयर इंडस्ट्री अब इस बात पर नजर रखेगी कि Cleveland Clinic जैसे बड़े हेल्थ सिस्टम्स इस प्लेटफॉर्म के पूर्ण एकीकरण के बाद क्या परिणाम हासिल करते हैं और क्या आउटपेशेंट कोडिंग का ऑटोमेशन भी इसी तरह की गति और सटीकता दे पाता है या नहीं।