परिचय: एंटरप्राइज रिसोर्स के रूप में AI
आज के समय में तकनीक का परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। एंटरप्राइज रिसोर्स के रूप में AI अब केवल एक सहायक उपकरण नहीं रह गया है, बल्कि यह कंपनियों के भीतर सीधे तौर पर काम करने लगा है। इसके बावजूद, एक बड़ा विरोधाभास बना हुआ है कि अधिकांश कंपनियां आज भी AI को पारंपरिक सॉफ्टवेयर लाइन आइटम की तरह ही ट्रैक और मैनेज कर रही हैं। यह स्थिति तकनीकी और वित्तीय मोर्चे पर कई सवाल खड़े करती है।
जब तकनीक किसी सिस्टम को सपोर्ट करने के बजाय खुद फैसले लेने लगे और काम करने लगे, तो उसका मैनेजमेंट भी बदलना चाहिए। लेकिन पुरानी पद्धतियों के चलते बाजार में कई तरह की वित्तीय और ऑपरेशनल अड़चनें सामने आ रही हैं।
बदलती स्थिति और क्या बदला है
पारंपरिक सॉफ्टवेयर गवर्नेंस की रचना ऐसे स्थिर ऑब्जेक्ट्स के लिए की गई थी जिनका बर्ताव एक तय तरीके से होता है। इसके विपरीत, AI का बर्ताव लगातार बदलता रहता है। यह मॉडल, प्रॉम्प्ट, डेटा, कॉन्टेक्स्ट, कनेक्टेड टूल्स और आसपास के वर्कफ्लो के आधार पर अलग तरह से काम करता है।
McKinsey की State of AI 2025 रिपोर्ट के अनुसार, 88% ऑर्गेनाइजेशन्स कम से कम एक फंक्शन में AI का उपयोग कर रही हैं। हालांकि, इनमें से केवल 39% कंपनियां ही इसका कोई भी EBIT (अर्निंग्स बिफोर इंटरेस्ट एंड टैक्सेज) पर प्रभाव बता पाती हैं। और जो कंपनियां यह प्रभाव बता पाती हैं, उनमें से अधिकांश के लिए यह असर 5% से भी कम है। यह डेटा साफ दिखाता है कि बड़े पैमाने पर AI का इस्तेमाल होने के बावजूद उसका सही वित्तीय मूल्यांकन और रिटर्न तय करना कितना मुश्किल साबित हो रहा है।
बढ़ता खर्च और वित्तीय निहितार्थ
Gartner के अनुमान के मुताबिक, साल 2026 में वैश्विक AI खर्च बढ़कर 2.59 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है, जो पिछले साल की तुलना में 47% अधिक है। यह भारी-भरकम निवेश इस बात का संकेत है कि कंपनियां तकनीक को तेजी से अपना रही हैं।
लेकिन इसके साथ ही जोखिम भी जुड़े हैं। Gartner भविष्यवाणी करता है कि 2028 तक, खराब आर्किटेक्चरल चॉइस और ऑपरेशनल जानकारी की कमी के कारण कम से कम आधे जेनरेटिव AI प्रोजेक्ट्स अपने तय बजट से अधिक खर्च कर जाएंगे।
इसके अलावा, लेखक और जानकारों का यह भी मानना है कि AI ऑपरेशनल कॉस्ट में ‘डिसीजन-मेकिंग कैपेसिटी’ की एक नई लेयर जोड़ देता है। यानी खर्च केवल सर्वर या लाइसेंस का नहीं, बल्कि फैसलों और वर्कफ्लो की जटिलता का भी होता है।
महत्वपूर्ण चुनौतियां और सीमाएं
AI के खर्च और उसके प्रबंधन को लेकर कई तकनीकी और आर्थिक सीमाएं सामने आ रही हैं:
- टोकन की खपत: Gartner का अनुमान है कि 2028 तक एजेंटिक वर्कफ्लो प्रति टोकन लागत पांच गुना से अधिक बढ़ सकती है, क्योंकि एजेंट्स एक स्टैंडर्ड चैटबॉट की तुलना में प्रति टास्क लगभग 5 से 30 गुना अधिक टोकन का उपयोग करते हैं।
- यूनिट प्राइस का भ्रम: हालांकि 2030 तक ट्रिलियन-पैरामीटर मॉडल पर इन्फेरेंस चलाने की लागत 2025 की तुलना में 90% से अधिक सस्ती हो जाएगी, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि कंपनियों का कुल खर्च स्वतः कम हो जाएगा। यदि एजेंटिक वर्कफ्लो में टोकन की खपत लगातार बढ़ती रही, तो सस्ती यूनिट प्राइस भी कंपनियों को ज्यादा राहत नहीं दे पाएगी।
- कस्टमर सर्विस लागत: Gartner के अनुसार, 2030 तक कस्टमर सर्विस में GenAI प्रति रिजोल्यूशन कॉस्ट 3 डॉलर से अधिक हो जाएगी, जो कि कई ऑफशोर ह्यूमन एजेंट्स की लागत से भी ज्यादा है।
पांच-भाग वाला गवर्नेंस मॉडल
इन तमाम चुनौतियों से निपटने के लिए एक नए और सुधरे हुए नजरिए की जरूरत है। लेख में एक पांच-भाग वाले गवर्नेंस मॉडल का प्रस्ताव दिया गया है, जो निम्नलिखित स्तंभों पर आधारित है:
- विजिबिलिटी (दृश्यता): हर AI वर्कफ्लो और उसके खर्च की स्पष्ट जानकारी होना।
- एट्रिब्यूशन (श्रेय/प्रभाव): यह ट्रैक करना कि AI का असल बिजनेस आउटकम और EBIT पर कितना असर पड़ रहा है।
- ऑप्टिमाइजेशन (अनुकूलन): टोकन की खपत और ऑपरेशनल खर्च को नियंत्रित करना।
- अकाउंटेबिलिटी (जवाबदेही): AI के फैसलों और प्रदर्शन के लिए स्पष्ट जिम्मेदारी तय करना।
- कंटीन्यूअिटी (निरंतरता): बदलते मॉडल्स और टूल्स के बीच सिस्टम को सुचारू रूप से चालू रखना।
किसे हो सकता है असर और आगे क्या देखना है
यह पूरा बदलाव उन सभी कंपनियों और लीडर्स को प्रभावित कर रहा है जो अपने बजट का बड़ा हिस्सा AI पर खर्च कर रहे हैं। आईटी लीडर्स, फाइनेंस डिपार्टमेंट और बिजनेस मैनेजर्स को अब अपनी रणनीति पर दोबारा विचार करना होगा। अनिश्चितताएं अभी भी बनी हुई हैं, जैसे कि क्या विशिष्ट संगठन बिना नई ट्रैकिंग प्रणालियों को लागू किए अपने हर AI वर्कफ्लो या प्रति सफल परिणाम लागत की सटीक सूची बना सकते हैं।
आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कंपनियां किस प्रकार अपने सॉफ्टवेयर-केंद्रित मैनेजमेंट दृष्टिकोण को छोड़कर एक वास्तविक एंटरप्राइज रिसोर्स गवर्नेंस मॉडल को अपनाती हैं, जिससे बढ़ता हुआ खर्च नियंत्रण में आ सके और AI निवेश का सही रिटर्न मिल सके।
