भारत का प्राइवेट स्पेस सेक्टर तेजी से विस्तार कर रहा है और देश के डीप-टेक इकोसिस्टम में एक नया अध्याय जोड़ रहा है। Department for Promotion of Industry and Internal Trade (DPIIT) के आंकड़ों के अनुसार, भारत में अब लगभग 440 स्पेस स्टार्ट-अप्स काम कर रहे हैं। इस सेक्टर में प्राइवेट इन्वेस्टमेंट छह गुना बढ़कर 618 मिलियन डॉलर (लगभग 1,000 करोड़ रुपये का VC पुश) तक पहुंच गया है, जो इस क्षेत्र में निवेशकों के बढ़ते भरोसे को दर्शाता है। India space startups से जुड़ी यह जानकारी इस विषय को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
India space startups: क्या है और क्यों महत्वपूर्ण है?
IN-SPACe ऑथराइजेशन और बिजनेस स्केलिंग पर फोकस
प्राइवेट कंपनियों को स्पेस एक्टिविटीज में सहायता और मंजूरी देने वाली नोडल एजेंसी IN-SPACe द्वारा अब तक 113 ऑथराइजेशन जारी किए जा चुके हैं। इंडस्ट्री लीडर्स के मुताबिक, भारत का प्राइवेट स्पेस सेक्टर अब अपने शुरुआती चरण से निकलकर एक नए ग्रोथ फेज में प्रवेश कर चुका है। अब कंपनियों का मुख्य ध्यान अपने ऑपरेशंस और बिजनेस मॉडल को बड़े पैमाने पर स्केल करने पर है।
PM नरेंद्र मोदी ने की स्पेस स्टार्ट-अप्स के CEOs से मुलाकात
23 अगस्त को मनाए जाने वाले National Space Day से पहले, 21 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेवा तीर्थ में 20 भारतीय स्पेस स्टार्ट-अप्स के फाउंडर्स और CEOs से खास मुलाकात की। इस बैठक में Skyroot Aerospace, AgniKul Cosmos और Digantara जैसे प्रमुख स्टार्ट-अप्स के प्रतिनिधि शामिल हुए।
लॉन्च व्हीकल और स्पेस डैब्रिस रिमूवल पर काम
बैठक के दौरान इन स्टार्ट-अप्स ने लॉन्च व्हीकल्स (Launch Vehicles) के निर्माण से लेकर स्पेस डैब्रिस रिमूवल (Space Debris Removal) यानी अंतरिक्ष के कचरे को साफ करने की नई तकनीकों पर अपने काम का प्रदर्शन किया। यह प्रगति भारत की स्पेस सोवरेनटी (Space Sovereignty) को मजबूत करने और ग्लोबल स्पेस टेक्नोलॉजी मार्केट में देश की स्थिति को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में अहम मानी जा रही है।
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मूल स्रोत: Organiser