AI visibility और टूल्स का इस्तेमाल: मार्केटिंग एजेंसियों के बदलते तौर-तरीके और ब्रांड्स के लिए नए नियम

मार्केटिंग और टेक्नोलॉजी के मौजूदा परिदृश्य में AI visibility एक केंद्रीय विषय बनकर उभरा है। साल 2026 के दौर में किसी मार्केटिंग एजेंसी से यह पूछना कि क्या वह अपने काम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करती है, ठीक वैसा ही है जैसे किसी एजेंसी से यह पूछना कि क्या वह ईमेल का उपयोग करती है। आज की तारीख में लगभग हर एजेंसी किसी न किसी रूप में AI टूल्स का सहारा ले रही है। लेकिन असली अंतर इस बात में है कि एजेंसी केवल अपने आंतरिक कार्यों को तेज करने के लिए सॉफ्टवेयर चला रही है, या फिर वह क्लाइंट्स के बिजनेस को आधुनिक AI इंजनों की सिफारिशों में स्थापित करने यानी वास्तविक AI visibility तैयार करने में सक्षम है।

इंटरनल एफिशिएंसी और एक्सटर्नल अथॉरिटी के बीच का यह फर्क समझना ब्रांड्स, चीफ मार्केटिंग ऑफिसर्स (CMOs) और बिजनेस लीडर्स के लिए बेहद जरूरी हो गया है। एक तरफ जहां टूल्स एजेंसी के काम को ऑटोमेट करते हैं, वहीं दूसरी तरफ विजिबिलिटी का संबंध इस बात से है कि प्रमुख AI प्लेटफॉर्म्स किसी कंपनी की विश्वसनीयता को किस तरह परखते हैं।

आंतरिक उत्पादकता बनाम AI visibility का निर्माण

जब कोई एजेंसी कहती है कि “we use AI” (हम AI का इस्तेमाल करते हैं), तो इसका सामान्य अर्थ उनके अपने वर्कफ़्लो से होता है। एजेंसियां अपने रोजमर्रा के आंतरिक कार्यों को ऑटोमेट करने के लिए इन टूल्स का सहारा ले रही हैं। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:

  • रिसर्च और शुरुआती आइडिया तैयार करना
  • डेटा एनालिसिस और परफॉर्मेंस रिपोर्टिंग
  • कंटेंट राइटिंग और ड्राफ्टिंग
  • डिजाइनिंग और विजुअल एसेट्स का निर्माण
  • सॉफ्टवेयर और वेब डेवलपमेंट
  • अन्य दोहराव वाले (repetitive) ऑपरेशंस

यह प्रक्रिया एजेंसी की कार्यक्षमता और स्पीड को जरूर बढ़ाती है, लेकिन इसका सीधा फायदा क्लाइंट की बाजार में प्रतिष्ठा या सर्च विजिबिलिटी पर तुरंत नहीं दिखता।

इसके विपरीत, AI visibility का केंद्र बिंदु बिल्कुल अलग है। यह इस बात पर आधारित है कि क्या आधुनिक AI सिस्टम्स—जैसे ChatGPT, Gemini, Perplexity, Claude, Copilot या Google AI Overviews—किसी बिजनेस के बारे में विश्वसनीय जानकारी खोज पा रहे हैं या नहीं। विजिबिलिटी तब मानी जाती है जब ये सिस्टम्स किसी बिजनेस को अच्छी तरह समझ सकें, अपने जवाबों में उसका उल्लेख (cite) कर सकें और यूजर्स को उसकी सेवाओं या प्रोडक्ट्स की सिफारिश (recommend) कर सकें।

तेजी से सिर्फ AI से कंटेंट तैयार कर देने से किसी कंपनी को अथॉरिटी नहीं मिल जाती और न ही वह अधिक क्रेडिबल बन जाती है। अधिक कंटेंट का उत्पादन केवल वॉल्यूम बढ़ाता है, लेकिन AI सिस्टम्स की नजर में विश्वसनीयता स्थापित करने के लिए यह अकेला पैमाना नहीं है।

7.3 मिलियन साइटेशन्स का विश्लेषण: अलग-अलग AI प्लेटफॉर्म्स की प्राथमिकताएं

आठ प्रमुख AI प्लेटफॉर्म्स पर किए गए लगभग 7.3 मिलियन (73 लाख) साइटेशन्स के एक बड़े विश्लेषण ने यह स्पष्ट किया है कि अलग-अलग सिस्टम्स जानकारी जुटाने के लिए एक जैसे स्रोतों पर निर्भर नहीं रहते। हर बड़े AI इंजन का अपना सोर्स प्रिफरेंस (पसंदीदा स्रोत) है:

  • Google AI Experiences: गूगल के AI अनुभवों में YouTube सबसे प्रमुख स्रोत बनकर उभरा।
  • Perplexity: पर्प्लेक्सिटी के साइटेशन्स में प्रोफेशनल नेटवर्क प्लेटफॉर्म LinkedIn का दबदबा देखा गया।
  • ChatGPT: चैटजीपीटी के शीर्ष स्रोतों में नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ (NIH) सबसे आगे रहा, जो आधिकारिक और शोध-आधारित डेटा को प्राथमिकता देने का संकेत देता है।
  • Grok: ग्रोक के संदर्भ में Wikipedia सबसे प्रमुख स्रोत के रूप में दर्ज किया गया।

यह डेटा इस बात की पुष्टि करता है कि किसी एक प्लेटफॉर्म के लिए की गई रणनीति दूसरे प्लेटफॉर्म पर पूरी तरह लागू नहीं हो सकती। हालांकि, इस सिंडिकेटेड रिपोर्ट में इस 7.3 मिलियन साइटेशन्स वाले अध्ययन और इसके लेखकों या रिसर्च फर्मों के विशिष्ट नाम का प्रत्यक्ष उल्लेख नहीं किया गया है, लेकिन इसके आंकड़े AI सर्च के बदलते रुझानों को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।

ब्रांड वेबसाइट्स और प्रभाव डालने योग्य स्रोत: 57% और 80% का गणित

रिसर्च से सामने आए आंकड़े यह रेखांकित करते हैं कि AI इंजनों की नजर में आने के लिए कंपनियों के अपने डिजिटल एसेट्स कितने महत्वपूर्ण हैं:

एक अध्ययन के अनुसार, वैश्विक स्तर पर AI साइटेशन्स में 57% हिस्सेदारी ब्रांड्स की अपनी स्वामित्व वाली वेबसाइट्स (brand-owned websites) की थी। हालांकि, यह प्रतिशत अलग-अलग प्लेटफॉर्म और इंडस्ट्री के आधार पर भिन्न हो सकता है। इसका सीधा मतलब यह है कि ब्रांड की अपनी वेबसाइट की गुणवत्ता, स्ट्रक्चर और सटीक डेटा AI के लिए प्राथमिक आधार बनते हैं।

वहीं, एक अन्य अध्ययन में यह बात सामने आई कि AI द्वारा उद्धृत किए गए 80% स्रोत ऐसे थे जिन्हें ब्रांड्स सीधे या परोक्ष रूप से प्रभावित कर सकते हैं। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:

  • ब्रांड की आधिकारिक वेबसाइट्स
  • आधिकारिक बिजनेस लिस्टिंग्स
  • ऑनलाइन डायरेक्टरीज
  • कस्टमर रिव्यू प्लेटफॉर्म्स

अध्ययन में यह भी देखा गया कि जब विश्लेषण से ब्रांड के अपने डोमेन को हटा दिया गया, तो ऑनलाइन डायरेक्टरीज और रिव्यू प्लेटफॉर्म्स सबसे प्रमुख स्रोतों के रूप में उभरकर सामने आए। यह दर्शाता है कि तीसरे पक्ष (third-party) के क्रेडिबल प्लेटफॉर्म्स पर ब्रांड की मौजूदगी कितनी असरदार साबित होती है।

Adobe का डेटा: AI-रेफर्ड ट्रैफिक का व्यावसायिक प्रभाव

बिजनेस और मार्केटिंग के दृष्टिकोण से AI विजिबिलिटी केवल एक टेक्निकल उपलब्धि नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर रेवेन्यू पर पड़ रहा है। सॉफ्टवेयर कंपनी Adobe के आंतरिक डेटा के अनुसार, AI प्लेटफॉर्म्स के जरिए आने वाला ट्रैफिक (AI-referred traffic) रेवेन्यू और कन्वर्जन के मामले में अन्य स्थापित चैनलों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर रहा है।

पारंपरिक सर्च इंजनों की तुलना में AI बॉट्स से आने वाले यूजर्स अक्सर अधिक स्पष्ट इरादे (high intent) के साथ आते हैं। जब कोई AI इंजन किसी यूजर की विशिष्ट समस्या के समाधान के रूप में किसी कंपनी को रिकमेंड करता है, तो उस सिफारिश में भरोसा अधिक होता है। परिणामस्वरूप, ऐसे ट्रैफिक का कन्वर्जन रेट अधिक मजबूत पाया गया है।

स्थापित मार्केटिंग डिसिप्लिन्स के साथ तालमेल

AI visibility कोई एकदम अलग-थलग या नया प्रयोग नहीं है। यह दशकों से चले आ रहे कई स्थापित मार्केटिंग विषयों का एक समन्वित रूप है। यह रणनीति मुख्य रूप से निम्नलिखित क्षेत्रों के साथ ओवरलैप करती है:

  • सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन (SEO)
  • पब्लिक रिलेशंस (PR)
  • कंटेंट मार्केटिंग
  • ऑनलाइन रेप्यूटेशन मैनेजमेंट
  • लोकल सर्च ऑप्टिमाइजेशन
  • ब्रांड बिल्डिंग

वास्तव में AI विजिबिलिटी एक पूरे “इकोसिस्टम की समस्या” (ecosystem problem) है। इसमें ब्रांड के स्वामित्व वाली वेबसाइट्स और बाहरी प्राधिकरणों (external authorities)—जैसे इंडस्ट्री पब्लिकेशन्स, वीडियो प्लेटफॉर्म्स, प्रोफेशनल नेटवर्क्स, डायरेक्टरीज और निष्पक्ष रिव्यूज—को एक-दूसरे को पुष्ट (reinforce) करना होता है। जब तक बाहर की स्वतंत्र दुनिया और ब्रांड के अपने दावे एक समान नहीं होते, तब तक AI मॉडल ब्रांड को सुरक्षित सिफारिश के रूप में नहीं स्वीकारते।

लोकल अथॉरिटी और मार्केट एविडेंस: कीवर्ड स्टफिंग की सीमा

स्थानीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने के लिए भी पारंपरिक तरीके अब काम नहीं आ रहे हैं। शोध के अनुसार, यदि किसी शहर (जैसे Kansas City) के किसी लोकल बिजनेस को अपनी अथॉरिटी साबित करनी है, तो उसे वास्तविक बाजार साक्ष्यों (real-world market evidence) की आवश्यकता होती है।

सिर्फ वेब पेज की कॉपी में शहर का नाम बार-बार लिखने या कीवर्ड स्टफिंग करने से AI इंजनों को धोखा नहीं दिया जा सकता। सिस्टम्स यह देखते हैं कि क्या उस बिजनेस की वास्तविक मौजूदगी स्थानीय डायरेक्टरीज, वास्तविक कस्टमर रिव्यूज, लोकल मीडिया कवरेज और कम्युनिटी नेटवर्क में दर्ज है या नहीं। वास्तविक दुनिया का डेटा ही डिजिटल स्पेस में क्रेडिबिलिटी तय करता है।

सीमाओं की वास्तविकता: कोई 'सीक्रेट डोर' या यूनिवर्सल चेकलिस्ट नहीं

एजेंसियों और क्लाइंट्स दोनों को इस बात की सीमाओं को समझना होगा। तथ्य यह है कि किसी भी सिंगल मार्केटिंग एजेंसी ने अब तक कोई ऐसी यूनिवर्सल ऑप्टिमाइजेशन चेकलिस्ट या ‘सीक्रेट डोर’ (गुप्त दरवाजा) नहीं खोजा है जिससे सभी AI प्लेटफॉर्म्स की सिफारिशों को पूरी तरह नियंत्रित किया जा सके।

AI सिस्टम्स के एल्गोरिदम जटिल हैं और लगातार विकसित हो रहे हैं। ऐसे में अगर कोई एजेंसी यह दावा करती है कि उसके पास AI रिकमेंडेशन की गारंटीशुदा चाबी है, तो यह जमीनी हकीकत से परे है।

एक पारदर्शी और भरोसेमंद एजेंसी का रुख यह स्वीकार करने में होता है: “We don’t know why your competitor is appearing there yet, but here’s how we’re going to figure it out” (हमें अभी यह पूरी तरह नहीं पता कि आपका प्रतिस्पर्धी वहां क्यों दिख रहा है, लेकिन हम यह पता लगाने के लिए यह तरीका अपनाने जा रहे हैं)। यह खुलापन और डेटा-आधारित अप्रोच ही इस अनिश्चित दौर में काम करने का व्यावहारिक तरीका है।

पुराने दौर में जैसे MapQuest से लेकर आधुनिक डिजिटल मैपिंग टूल्स तक तकनीक का सफर बदला है, और 1969 से लेकर आज के विकसित इंटरनेट युग तक टूल्स बदले हैं, उसी तरह सर्च का बुनियादी ढांचा भी बदल चुका है।

आगे क्या देखें: क्लाइंट्स और एजेंसियों के लिए नई रणनीति

मार्केटिंग लीडर्स को अब एजेंसियों के मूल्यांकन का पैमाना बदलना होगा। एजेंसी हायर करते समय यह देखने के बजाय कि वे किस AI टूल से कंटेंट लिख रहे हैं, यह देखना होगा कि:

  • क्या उनके पास AI साइटेशन इकोसिस्टम को समझने की क्षमता है?
  • क्या वे आपकी वेबसाइट के 57% कोर साइटेशन पोटेंशियल को मजबूत कर सकते हैं?
  • क्या वे तीसरे पक्ष के 80% प्रभाव योग्य स्रोतों (रिव्यूज, डायरेक्टरीज, प्रोफेशनल नेटवर्क्स) पर आपकी अथॉरिटी बना सकते हैं?

AI टूल्स का इस्तेमाल केवल एजेंसी की लागत घटाने या स्पीड बढ़ाने का साधन हो सकता है, लेकिन क्लाइंट्स की सफलता अंततः इस बात पर निर्भर करेगी कि वे आधुनिक AI इकोसिस्टम में कितने प्रामाणिक और दृश्यमान हैं।