अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने एक सोमवार को Roy Moore की उस कानूनी याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें उन्होंने एक चुनावी विज्ञापन से संबंधित $8.2 million के मानहानि फैसले को फिर से बहाल करने की मांग की थी। इस फैसले के साथ ही Roy Moore Defamation Case में कानूनी लड़ाई पूरी तरह समाप्त हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के इस कदम से 11th Circuit कोर्ट ऑफ अपील्स का वह फैसला बरकरार रहा है, जिसने 2022 में एक फेडरल जूरी द्वारा दिए गए हर्जाने के आदेश को रद्द कर दिया था।
सुप्रीम कोर्ट के जजों ने इससे पहले जून के महीने में 11th Circuit के आदेश पर रोक लगाने (stay) के लिए दायर की गई Roy Moore की इमरजेंसी अर्जी को भी खारिज कर दिया था। अब अदालत द्वारा मुख्य अपील पर विचार करने से इनकार करने के बाद, राजनीतिक विज्ञापन और मानहानि के इस हाई-प्रोफाइल मामले में कानूनी विकल्प पूरी तरह बंद हो गए हैं।
Roy Moore Defamation Case का बैकग्राउंड और चुनावी विवाद
यह पूरा कानूनी विवाद 2017 के अलबामा (Alabama) सीनेट चुनाव के दौरान प्रसारित किए गए एक टेलीविजन विज्ञापन से जुड़ा हुआ है। 2017 के सीनेट चुनाव के अंतिम दिनों में ‘Highway 31’ नामक एक विज्ञापन को कुल 533 बार टीवी पर प्रसारित किया गया था। इस विज्ञापन को लेकर Roy Moore ने Senate Majority PAC के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया था।
2017 के उस सीनेट चुनाव में Roy Moore को डेमोक्रेटिक उम्मीदवार Doug Jones के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। चुनाव में हार के बाद, Moore ने इस राजनीतिक विज्ञापन के खिलाफ कानूनी लड़ाई शुरू की और आरोप लगाया कि विज्ञापन में उनके चरित्र और छवि को दुर्भावनापूर्ण तरीके से नुकसान पहुंचाया गया था।
2022 का जूरी वर्डिक्ट और 11th Circuit का फैसला
इस कानूनी लड़ाई में शुरुआती दौर में Roy Moore को एक बड़ी जीत मिली थी। साल 2022 में एक फेडरल जूरी ने Moore के पक्ष में फैसला सुनाया था और उन्हें हर्जाने के रूप में $8.2 million का अवार्ड दिया था। जूरी ने माना था कि विज्ञापन के जरिए मानहानि की गई थी।
हालांकि, Senate Majority PAC ने इस फैसले को 11th Circuit कोर्ट में चुनौती दी। अपीलीय अदालत ने 2022 के जूरी फैसले को पूरी तरह उलट दिया (reversed and vacated)। 11th Circuit ने अपने विश्लेषण में पाया कि Roy Moore ऐतिहासिक New York Times v. Sullivan कानूनी मानक के तहत ‘actual malice’ (वास्तविक द्वेष) साबित करने में पूरी तरह विफल रहे। अमेरिकी कानून में सार्वजनिक हस्तियों या राजनेताओं के मानहानि मामलों में ‘actual malice’ साबित करना एक अनिवार्य कानूनी शर्त है।
विज्ञापन सामग्री और दोनों पक्षों के कानूनी दावे
इस पूरे मामले में मुख्य विवाद विज्ञापन को तैयार करने और उसमें दी गई जानकारी की प्रस्तुति को लेकर था। दोनों पक्षों ने अदालत में अपने-अपने तर्क रखे थे:
वादी (Roy Moore) का पक्ष
Roy Moore के वकीलों का दावा था कि Highway 31 विज्ञापन में अलग-अलग न्यूज रिपोर्ट्स और क्लिपिंग्स को इस तरह साथ जोड़कर (juxtapose) पेश किया गया, जिससे यह झूठा प्रभाव पैदा हुआ कि Moore ने एक शॉपिंग मॉल में कम उम्र की लड़कियों से यौन संबंध बनाने की मांग की थी। Moore की लीगल टीम ने इसे “fabricated accusation, never made by any reporter” (गढ़ा हुआ आरोप, जो किसी भी रिपोर्टर द्वारा कभी नहीं लगाया गया था) करार दिया।
Moore के वकीलों ने यह भी तर्क दिया कि इस मामले के परिणाम सिर्फ इस एक केस तक सीमित नहीं हैं। उन्होंने चिंता जताई कि “if a publisher can escape a jury’s verdict by accurately quoting each fragment while manufacturing a false whole, Masson’s core holding is nullified for political ads” (यदि कोई प्रकाशक प्रत्येक अंश को सही तरीके से उद्धृत करते हुए एक झूठा समग्र प्रभाव तैयार करके जूरी के फैसले से बच सकता है, तो राजनीतिक विज्ञापनों के लिए Masson केस का मूल कानूनी सिद्धांत निष्प्रभावी हो जाता है)।
प्रतिवादी (Senate Majority PAC) का तर्क
दूसरी तरफ, Senate Majority PAC ने अदालत में दृढ़ता से यह तर्क दिया कि प्रसारित किया गया विज्ञापन पूरी तरह से सच (truthful) था। उनका कहना था कि विज्ञापन में जो तथ्य और मीडिया रिपोर्ट्स शामिल की गई थीं, वे तथ्यात्मक रूप से सही थीं और राजनीतिक चर्चा के दायरे में आती थीं।
Leigh Corfman के आरोप और Roy Moore का रुख
इस विवाद के केंद्र में वे आरोप भी शामिल थे जो 2017 के चुनाव प्रचार के दौरान सार्वजनिक रूप से सामने आए थे। Leigh Corfman नामक महिला ने आरोप लगाया था कि 1979 में Roy Moore ने उन्हें गलत तरीके से छुआ था। आरोपों के अनुसार, 1979 में उस समय Leigh Corfman की उम्र 14 वर्ष थी, जबकि Roy Moore की उम्र 32 वर्ष थी।
Roy Moore ने Leigh Corfman द्वारा लगाए गए इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया था और हमेशा इनका खंडन किया। हालांकि, इन आरोपों और उनसे संबंधित मीडिया कवरेज को बाद में चुनावी विज्ञापनों और बयानों में इस्तेमाल किया गया, जिसने अंततः इस मानहानि मुकदमे का रूप लिया।
राजनीतिक विज्ञापनों और पब्लिशर्स पर फैसले के कानूनी निहितार्थ
सुप्रीम कोर्ट द्वारा Moore की याचिका को खारिज करने के कई कानूनी और व्यावहारिक प्रभाव सामने आए हैं:
- New York Times v. Sullivan के मानक की मजबूती: 11th Circuit का निर्णय बरकरार रहने से यह स्पष्ट हो गया है कि राजनीतिक हस्तियों के खिलाफ विज्ञापनों में मानहानि सिद्ध करने के लिए ‘actual malice’ साबित करने की देहरी अत्यंत ऊंची बनी हुई है।
- समाचार अंशों के उपयोग की स्वतंत्रता: अदालत के इस रुख से राजनीतिक कमेटियों (PACs) और पब्लिशर्स को विभिन्न समाचार अंशों को संकलित कर विज्ञापन बनाने के मामलों में विधिक सुरक्षा की स्थिति स्पष्ट होती है, जब तक कि जानबूझकर झूठ फैलाने का प्रमाण न मिले।
- Masson कानूनी मिसाल की व्याख्या: Moore के वकीलों ने Masson मानक के कमजोर पड़ने की दलील दी थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप न करने से अपीलीय अदालत का दृष्टिकोण ही प्रभावी बना रहेगा।
- Moore की कानूनी चुनौती का अंत: 533 बार प्रसारित इस विज्ञापन को लेकर शुरू हुई लंबी कानूनी लड़ाई अब औपचारिक रूप से समाप्त हो गई है और $8.2 million के हर्जाने की कोई संभावना बाकी नहीं बची है।
आगे क्या देखना होगा
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद Roy Moore के पास इस विज्ञापन को चुनौती देने का कोई और कानूनी रास्ता नहीं बचा है। हालांकि, अमेरिकी कानूनी और राजनीतिक हलकों में राजनीतिक अभियानों में दिए जाने वाले विज्ञापनों, उनके संदर्भों को जोड़ने की प्रक्रिया और New York Times v. Sullivan के तहत तय किए गए वास्तविक द्वेष (actual malice) के मानकों पर बहस जारी रहने की संभावना है।
