सौरमंडल के सबसे बड़े ग्रह बृहस्पति (Jupiter) के विशाल चुंबकीय क्षेत्र का अध्ययन कर रहे वैज्ञानिकों को एक महत्वपूर्ण सफलता मिली है। NASA के Juno spacecraft Jupiter data के नए और विस्तृत विश्लेषण से यह खुलासा हुआ है कि active periods के दौरान Jupiter का ring-shaped magnetodisk एक स्थिर या समतल शीट रहने के बजाय एक तरंगदार (wave-like, rippling) संरचना में मुड़ जाता है। Shandong University के नेतृत्व में शोधकर्ताओं की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने Juno probe के डेटा का अध्ययन कर इस भौतिक घटना की पुष्टि की है।
NASA का Juno mission वर्ष 2016 से Jupiter का चक्कर लगा रहा है। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य ग्रह के magnetosphere और इसके सबसे आंतरिक ज्वालामुखीय चंद्रमा Io के बीच होने वाले जटिल इंटरैक्शन को समझना है। सामान्य तौर पर, Juno spacecraft अपनी प्रत्येक rotation के दौरान magnetodisk की current sheet को दो बार पार (cross) करता है। हालांकि, magnetodisk reconnection events के दौरान जुटाए गए डेटा से पता चला है कि current sheet में लगातार हलचल होती है और यह सामान्य संतुलन की स्थिति से दूर खिसक जाती है।
Juno Spacecraft Jupiter Data और Shandong University की रिसर्च
Shandong University के नेतृत्व में शोधकर्ताओं ने Juno spacecraft के magnetometer और energetic particle detectors द्वारा दर्ज किए गए डेटा का गहराई से विश्लेषण किया। अध्ययन के दौरान यह पाया गया कि magnetodisk reconnection events के समय Juno ने current sheet को बार-बार क्रॉस किया और लगभग हर बार एक ही साफ चुंबकीय हस्ताक्षर (clear magnetic signature) डिटेक्ट किया।
डेटा विश्लेषण से यह बात सामने आई कि magnetodisk में मौजूद current sheet एक लहर की तरह गति करती है। current sheet में यह तरंग या ripples कुछ मिनटों से लेकर एक घंटे से भी अधिक समय तक बनी रहती हैं। रिसर्च टीम ने पाया कि magnetodisk के भीतर लगभग 100 degrees longitude में फैले कई छोटे-छोटे reconnection sites मौजूद हैं। ये reconnection sites लगातार disk की चुंबकीय बल रेखाओं (magnetic field lines) को तोड़ते हैं और current sheet को उसके equilibrium position से बाहर धकेलते हैं।
Io और Jupiter के Magnetodisk का संबंध
Jupiter हमारे सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह है, और Io इसका सबसे आंतरिक ज्वालामुखीय चंद्रमा (volcanic innermost moon) है। Io से निकलने वाला प्रचंड ज्वालामुखीय मलबे का पदार्थ और Jupiter का अत्यधिक तीव्र rotational speed मिलकर इस विशाल ring-shaped magnetodisk को ऊर्जा प्रदान करते हैं।
जब magnetodisk में reconnection की प्रक्रिया होती है, तो यह चुंबकीय ऊर्जा को कणों की गतिज ऊर्जा में बदल देती है। Juno spacecraft Jupiter data इस बात की पुष्टि करता है कि इस प्रक्रिया के दौरान magnetodisk एक सरल, ऊपर-नीचे होने वाली समतल पट्टी के बजाय जटिल लहरीली संरचना (rippling structure) का रूप ले लेती है। क्योंकि Jupiter का magnetodisk बहुत तेज़ी से घूमता है, इसलिए यह पूरा लहरीला current sheet ग्रह के साथ ही चारों ओर घूमता रहता है।
Earth और Jupiter के Magnetosphere में मुख्य अंतर
शोधकर्ताओं ने इस अध्ययन में पृथ्वी (Earth) और बृहस्पति (Jupiter) के चुंबकीय व्यवहार के बीच एक बड़ा अंतर रेखांकित किया है। पृथ्वी के magnetotail में जब kink waves उत्पन्न होती हैं, तो वे reconnection sites से दूर बाहर की ओर बढ़ती हैं। इसके विपरीत, Jupiter का magnetodisk अपने अत्यधिक तेज़ घुमाव (rapid rotation) के कारण पूरी रिपल्ड current sheet को ग्रह के साथ ही घूमाता रहता है।
यह तकनीकी अंतर planetary space physics की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। Science China Press और Universe Today में प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, लेखक Matt Williams और शोध टीम ने बताया कि Jupiter का यह अनोखा व्यवहार दर्शाता है कि गैस जायंट ग्रहों का magnetosphere किस प्रकार काम करता है।
अनिश्चितताएं और भावी रिसर्च के सवाल
हालांकि इस डेटा विश्लेषण से magnetodisk की संरचना स्पष्ट हुई है, फिर भी कुछ वैज्ञानिक सवाल और अनिश्चितताएं बनी हुई हैं। Shandong University की टीम के अनुसार, यह संभावना बनी हुई है कि यह rippling current sheet Io से निकलने वाले ज्वालामुखीय कणों (volcanic particles) के त्वरण (acceleration) और परिवहन (transportation) को प्रभावित कर सकती है।
शोधकर्ताओं का मानना है कि यदि ये ज्वालामुखीय कण लहरीली शीट के प्रभाव में आते हैं, तो ये particles Jupiter के ionosphere और magnetodisk के बीच के संबंध को अधिक जटिल बना सकते हैं। इस प्रक्रिया को पूरी तरह समझने के लिए आगे भी Juno spacecraft Jupiter data का और अधिक गहन विश्लेषण करने की आवश्यकता होगी।
Juno Mission की समयसीमा और Galileo Probe का इतिहास
NASA ने Juno probe को 2016 में Jupiter के ऑर्बिट में स्थापित किया था। Galileo probe के बाद Juno ही एकमात्र ऐसा स्पेसक्राफ्ट है जो विशेष रूप से Jupiter की खोज और अध्ययन पर केंद्रित है। NASA का Galileo probe पहला ऐसा स्पेसक्राफ्ट था जिसने केवल Jupiter का एक्सप्लोरेशन किया था।
Juno मिशन को अपने प्राथमिक लक्ष्यों को पूरा करने के बाद extended mission चरण में भेजा गया है। वर्तमान समय-सारणी के अनुसार, Juno का extended mission सितंबर 2028 तक जारी रहने वाला है। सितंबर 2028 तक का यह अतिरिक्त समय वैज्ञानिकों को Jupiter के magnetosphere, Io के ज्वालामुखीय प्रभावों और magnetodisk की dynamic गतिविधियों के बारे में और अधिक डेटा एकत्र करने का अवसर प्रदान करेगा।
स्पेस साइंस और डेटा एनालिसिस पर प्रभाव
Juno spacecraft Jupiter data द्वारा प्रस्तुत ये निष्कर्ष खगोलशास्त्रियों को planetary magnetic fields के कंप्यूटर मॉडल सुधारने में मदद करेंगे। Reconnection events के दौरान 100 degrees longitude में फैले Reconnection sites और ripples की मौजूदगी यह साबित करती है कि Jupiter का magnetosphere सौरमंडल की सबसे गतिशील और ऊर्जावान प्रणालियों में से एक है। सितंबर 2028 तक Juno स्पेसक्राफ्ट से मिलने वाले डेटा से इस क्षेत्र में और भी नई जानकारियां मिलने की उम्मीद है।
