हैनोई के पोस्ट्स एंड टेलीकम्युनिकेशंस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (PTIT) में ऑस्ट्रेलिया-वियतनाम स्ट्रैटेजिक टेक्नोलॉजीज फोरम का आयोजन किया गया। इस फोरम का मुख्य विषय “स्ट्रैटेजिक टेक्नोलॉजीज फॉर रिजिलिएंट फ्यूचर” रखा गया था। इस आयोजन में दोनों देशों के तकनीकी सहयोग और भविष्य की रणनीतिक तकनीकों पर चर्चा की गई।
क्या बदला और मुख्य उद्देश्य
यह फोरम केवल अकादमिक चर्चाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें व्यावहारिक अनुभवों, हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग, टेक्नोलॉजी डेमो और वैज्ञानिक प्रतिभाओं को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। इस आयोजन का उद्देश्य दोनों देशों के बीच तकनीकी साझेदारी को मजबूत करना और समावेशी विकास मूल्यों को बढ़ावा देना है।
AVSTC की भूमिका और स्थापना
इस दिशा में एक बड़ा कदम ऑस्ट्रेलिया-वियतनाम स्ट्रैटेजिक टेक्नोलॉजीज सेंटर (AVSTC) है, जिसे यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी सिडनी (UTS), PTIT और नोकिया (Nokia) द्वारा सह-स्थापित किया गया है। इसे ऑस्ट्रेलियाई और वियतनामी सरकारों का समर्थन प्राप्त है और इसकी शुरुआत जून 2025 में हुई थी।
इस केंद्र ने अपनी शुरुआत से लेकर अब तक कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं:
- एक दर्जन से अधिक ऑस्ट्रेलिया-वियतनाम स्ट्रैटेजिक टेक्नोलॉजीज सीड ग्रांट्स को समर्थन दिया है।
- AI सेफ्टी, AI-संचालित साइन लैंग्वेज इंटरप्रिटेशन, क्वांटम टेक्नोलॉजी एप्लीकेशन और डिजिटल ट्विन-इनेबल्ड एजुकेशन जैसे टेक्नोलॉजी यूज़ केस विकसित किए हैं।
- वियतनाम भर के छात्रों और इंजीनियरों को 100 से अधिक AVST छात्रवृत्तियां प्रदान की हैं।
- ‘वुमन इन टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन अवार्ड्स’ की शुरुआत की है, जिसके तहत वियतनाम की लगभग 30 महिला वैज्ञानिकों, लीडर्स और स्टूडेंट्स को सम्मानित किया गया है।
तकनीकी कार्यक्रम और प्रमुख क्षेत्र
फोरम का तकनीकी कार्यक्रम कई महत्वपूर्ण और उभरती हुई तकनीकों पर केंद्रित था। इसमें निम्नलिखित क्षेत्रों को शामिल किया गया:
- 5G/6G नेटवर्क तकनीक
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)
- साइबर सुरक्षा (Cybersecurity)
- क्वांटम टेक्नोलॉजी
- रियल-टाइम फ्लड इंटेलिजेंस
- ह्यूमन-सेंट्रिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
- ऑटोनॉमस रोबोटिक सिस्टम्स
- एडवांस्ड सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजीज
सेक्टर पर प्रभाव और इंडस्ट्री पार्टनर्स
इस केंद्र द्वारा समर्थित AI और डिजिटल ट्विन-इनेबल्ड एजुकेशन प्लेटफॉर्म्स का परीक्षण यूओटीके (YooTek) जैसे इंडस्ट्री पार्टनर द्वारा हनोई के स्कूलों के छात्रों पर किया गया है। यह उद्योग जगत और अकादमिक संस्थानों के बीच सहयोग का एक बेहतरीन उदाहरण है, जिससे छात्रों को व्यावहारिक अनुभव मिल रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह पहल केवल शोध तक सीमित नहीं है बल्कि वास्तविक दुनिया की समस्याओं के समाधान तलाशने में मदद कर रही है। हनोई में आयोजित इस फोरम ने साबित कर दिया है कि रणनीतिक साझेदारियों के जरिए जटिल तकनीकी चुनौतियों का सामना किया जा सकता है।
आगे क्या देखना बाकी है
आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि AVSTC द्वारा शुरू किए गए सीड ग्रांट्स और रिसर्च प्रोजेक्ट्स किस तरह से कमर्शियल या वास्तविक इस्तेमाल में तब्दील होते हैं। इसके अलावा, 5G/6G और क्वांटम टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग कितना आगे बढ़ता है, इस पर भी सबकी नजरें रहेंगी।
