ग्लोबल वित्तीय बाजारों में इन दिनों बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। एक व्यापक ग्लोबल बॉन्ड सेलऑफ़ के चलते डॉलर में तेज उछाल आया है और यह यूरो के मुकाबले 17 महीने के सबसे ऊपरी स्तर पर पहुंच गया है। इस पूरी हलचल के पीछे अमेरिका और यूरोप में सरकारी बॉन्ड की बढ़ती यील्ड (yield) और तेल की ऊंची कीमतें मुख्य वजहें रही हैं।
what changed: डॉलर और बॉन्ड मार्केट में बदलाव
गुरुवार को डॉलर यूरो के मुकाबले 17 महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया। इस दौरान यूरोपीय करेंसी $1.1215 के नीचे आ गई, जो मई 2025 के बाद पहली बार हुआ है। यूरो में आई इस कमजोरी के कारण यह सितंबर महीने में करीब 2.5% की गिरावट के साथ बंद हुआ, जो जुलाई 2025 के बाद इसका सबसे बड़ा मासिक घाटा है। वहीं दूसरी ओर, बेंचमार्क US 10-साल के नोटों की यील्ड 2002 के बाद के अपने सबसे उच्चतम स्तर पर पहुंच गई, हालांकि बाद में यह 5.65 बेसिस पॉइंट गिरकर 5.237% पर आ गई।
सितंबर महीने में ग्लोबल बॉन्ड को सालों में सबसे बड़ी मासिक गिरावट का सामना करना पड़ा। सरकारी वित्त में गिरावट, बॉन्ड की भारी सप्लाई और बढ़ती महंगाई के कारण यील्ड में यह उछाल आया है। बुधवार को जारी आंकड़ों से पता चला कि अमेरिका में अगस्त के दौरान महंगाई उम्मीद से कम रही और जुलाई के आंकड़ों में भी संशोधन किए गए। इसके विपरीत, यूरो जोन में महंगाई में तेजी ने ऊर्जा कीमतों के जोखिम को और बढ़ा दिया है।
key benefits और बाजार के कारक
विभिन्न करेंसी बास्केट के मुकाबले डॉलर ने सितंबर के अंत तक लगातार छठे तिमाही लाभ दर्ज किए, जिससे यह अप्रैल 2025 के बाद अपने सबसे मजबूत स्तर पर पहुंच गया। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि इस बढ़ोतरी के पीछे कई कारक जुड़े हैं।
NatWest Markets और Klarity FX के जानकारों के अनुसार, बढ़ती यील्ड मुख्य रूप से फिस्कल पॉलिसी को लेकर चिंता, विशेष रूप से फ्रेंच बॉन्ड मार्केट में कमजोरी, ऊर्जा की कीमतें और बढ़ती महंगाई के कारण है। जानकारों का कहना है कि डॉलर में पिछले कई हफ्तों से बढ़त जारी है और हर बार कोई नया नैरेटिव इसे थोड़ा और बूस्ट दे देता है।
risks or limitations: यूरोपीय बाजारों में घबराहट और जोखिम
विश्लेषकों का यह भी मानना है कि इनमें से सबसे चिंताजनक पहलू यूरोपीय बाजारों में फैली घबराहट है। फ्रांस का कर्ज स्तर बहुत अधिक बढ़ गया है और फ्रांस तथा जर्मनी के बीच स्प्रेड (spread) में चौड़ाई ने निवेशकों को असहज कर दिया है। इसके चलते यूरो ने काफी जमीन खो दी है और यह गिरावट और तेज हो गई है।
इसके अलावा, ऑस्ट्रेलिया का डॉलर भी घरेलू महंगाई के अनुमानों से कम रहने के बाद तीन महीने के निचले स्तर $0.69040 पर आ गया।
business implications और केंद्रीय बैंकों की नीतियां
मार्केट की उम्मीदें इस बात की ओर इशारा करती हैं कि फेडरल रिजर्व समेत कई बड़े सेंट्रल बैंक आने वाले समय में मॉनेटरी टाइटनिंग जारी रख सकते हैं। हालांकि पिछले कुछ दिनों में PCE के आंकड़ों के बाद दरों में नरमी की सुगबुगाहट जरूर दिखी है, लेकिन व्यापक बाजार दृष्टिकोण यही है कि फेडरल रिजर्व की तरफ से अतिरिक्त टाइटनिंग (tightening) अभी आना बाकी है।
French bond market की कमजोरी का ग्लोबल बाजारों पर असर पड़ना भी अनिश्चितताओं के दायरे में है, लेकिन इससे निवेशकों की धड़कनें बढ़ी हुई हैं।
what to watch next
आने वाले हफ्तों में निवेशकों की नजरें सेंट्रल बैंकों के अगले कदमों, अमेरिका और यूरोप के आर्थिक आंकड़ों तथा एनर्जी मार्केट की चाल पर रहेंगी। ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में जारी यह उतार-चढ़ाव आगे भी करेंसी और फाइनेंस मार्केट की दिशा तय करेगा।
