नकली शॉपिंग वेबसाइट्स दे रही हैं बिना पैसों के खर्च के शॉपिंग का मजा

ऑनलाइन शॉपिंग का अनुभव आज के समय में सिर्फ जरूरत नहीं, बल्कि कई लोगों के लिए एक तनाव मुक्ति का जरिया बन चुका है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि बिना एक भी रुपया खर्च किए और बिना कोई सामान घर मंगाए भी शॉपिंग का वही रोमांच मिल सकता है? हाल के दिनों में इंटरनेट पर कुछ ऐसी फर्जी या नकली शॉपिंग वेबसाइट्स सामने आई हैं, जो यूजर्स को बिना किसी असली खरीदारी के शॉपिंग का पूरा अनुभव देती हैं। इन प्लेटफॉर्म्स का मुख्य मकसद यूजर्स को केवल ‘डोपामाइन हिट’ यानी मानसिक संतुष्टि और रोमांच प्रदान करना है।

what changed: कैसे शुरू हुआ बिना खरीदारी के शॉपिंग का यह अनोखा ट्रेंड

इस अनोखे ट्रेंड की शुरुआत मार्च महीने में सियोल, दक्षिण कोरिया से हुई थी। वहां 21 साल के एक मैकेनिकल इंजीनियरिंग के छात्र, Seohyun Park ने FoodNeverArrives नाम से एक फेक फूड डिलीवरी साइट बनाई थी। इसके बाद इस कॉन्सेप्ट ने तेजी से दुनिया भर में लोकप्रियता हासिल की। इस शुरुआती सफलता के बाद, इस तर्ज पर कई अन्य प्लेटफॉर्म्स भी लॉन्च किए गए।

आज के समय में ऐसे कई प्लेटफॉर्म्स सक्रिय हैं, जो यूजर्स को वर्चुअल शॉपिंग का अनुभव देते हैं। इनमें FoodNeverComes, FakeHaul और TripNeverLeaves जैसे नाम शामिल हैं। ये सभी प्लेटफॉर्म्स असली ई-कॉमर्स वेबसाइट्स की तरह ही काम करते हैं, लेकिन इनमें लेनदेन का अंत $0.00 पर होता है।

key benefits: क्या हैं इन नकली शॉपिंग वेबसाइट्स की खासियतें

इन प्लेटफॉर्म्स पर यूजर्स को ब्राउजिंग से लेकर ऑर्डर ट्रैकिंग और चेकआउट तक का बिल्कुल असली जैसा अनुभव मिलता है। इन वेबसाइट्स की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • FoodNeverComes: इस प्लेटफॉर्म पर 22 राष्ट्रीय व्यंजन और 327 अलग-अलग डिशेज उपलब्ध हैं। इसमें नकली कीमतें दिखाई जाती हैं और एक सिम्युलेटेड चेकआउट होता है। इस साइट के दो मिलियन से ज्यादा यूजर्स हैं।
  • विभिन्न श्रेणियां और उत्पाद: इन साइट्स पर कई तरह के आकर्षक सामान लिस्ट किए जाते हैं। उदाहरण के लिए, एक गबार्डिन ट्रेंच कोट जिसकी असली कीमत $159.99 दिखाई जाती है, उसे छूट के बाद $74.99 दर्शाया जाता है। इसके अलावा ब्लूटूथ ईयरबड्स ($79.99 से घटकर $24.99), एक फोल्डेबल ड्राइंग रैक ($28.99), और एक लग्जरी पेट बेड (मूल रूप से $79.99, जिसे $34.99 में दिखाया गया) जैसी चीजें शामिल होती हैं। इन सभी का कुल योग $134.97 दिखाया जाता है, लेकिन चेकआउट का खर्च $0.00 होता है।
  • अन्य प्लेटफॉर्म्स: US-बेस्ड मेगास्टोर FakeHaul के पास हजारों यूजर्स हैं, जबकि TripNeverLeaves छुट्टियों पर आधारित एक फेक साइट है जो तेजी से लोकप्रियता हासिल कर रही है।
  • भारतीय डेवलपर्स का योगदान: FoodNeverComes को उदयपुर के दो 26 साल के सॉफ्टवेयर डेवलपर्स ने मिलकर तैयार किया है। इस साइट की टैगलाइन बेहद दिलचस्प है— ‘द फूड नेवर कम्स बट द डोपामाइन डस’ (खाना कभी नहीं आता लेकिन डोपामाइन मिल जाता है)।
  • विजिटर ट्रैफिक: Seohyun Park की मूल साइट FoodNeverArrives पर हर महीने कम से कम 10,000 विजिटर्स आते हैं।

business implications: क्या कहते हैं विशेषज्ञ और क्या है इसके पीछे का विज्ञान

इस तरह के प्लेटफॉर्म्स के उभरने के पीछे मनोवैज्ञानिक और व्यावसायिक कारण दोनों जुड़े हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मानव मस्तिष्क में खरीदारी की प्रक्रिया से ज्यादा उसकी चाहत में आनंद छिपा होता है।

Yale Center for Customer Insights के डायरेक्टर रवि Dhar के अनुसार, ‘एंटीसिपेटरी यूटिलिटी’ या तलाश का रोमांच उपभोग के वास्तविक आनंद की तुलना में अधिक शक्तिशाली हो सकता है। यानी सामान मिलने की खुशी से ज्यादा उसे तलाशने और खरीदने की प्रक्रिया में जो रोमांच मिलता है, वह दिमाग को सक्रिय करता है।

इसके अलावा, ‘Dopamine Nation’ की लेखिका और प्रोफेसर Anna Lembke इन वेबसाइट्स की तुलना ‘डिजिटल नियर-बीयर’ (बिना नशे वाली बीयर) से करती हैं। उनका कहना है कि ये साइट्स असली रिवॉर्ड के बिना रिवॉर्ड का नशा या उच्च आनंद प्रदान करती हैं।

risks or limitations: जोखिम और सीमाएं

हालांकि ये वेबसाइट्स किसी भी तरह का वित्तीय नुकसान नहीं पहुंचाती हैं क्योंकि इनमें चेकआउट पूरी तरह से मुफ्त ($0.00) होता है, फिर भी इनसे जुड़े कुछ मनोवैज्ञानिक पहलू हो सकते हैं। चूंकि ये प्लेटफॉर्म्स यूजर्स को बिना किसी वास्तविक परिणाम के त्वरित संतुष्टि देते हैं, इसलिए लंबे समय तक इनका उपयोग डिजिटल आदतों या वर्चुअल स्क्रीन पर निर्भरता को बढ़ा सकता है। हालांकि, वित्तीय धोखाधड़ी या डेटा चोरी का जोखिम इनमें नहीं होता क्योंकि असली भुगतान गेटवे का उपयोग नहीं किया जाता।

who may be affected: किसे प्रभावित कर रहा है यह ट्रेंड

नौजवान पीढ़ी, टेक-सैवी यूजर्स और वे लोग जो ऑनलाइन शॉपिंग के आदी हैं लेकिन अपने खर्चों को नियंत्रित करना चाहते हैं, वे इस नए ट्रेंड से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। इसके अलावा, पारंपरिक ई-कॉमर्स सेक्टर के लिए यह सोचना का विषय है कि कैसे कंज्यूमर साइकोलॉजी अब केवल सामान खरीदने तक सीमित न रहकर केवल ब्राउजिंग के अनुभव से भी संतुष्ट हो सकती है।

what to watch next: आगे क्या देखना होगा

आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस तरह के वर्चुअल और सिम्युलेटेड प्लेटफॉर्म्स एक अलग डिजिटल मनोरंजन उद्योग का रूप लेते हैं या नहीं। क्या अन्य डेवलपर्स भी इस प्रकार के ‘नो-कॉस्ट’ फन ऐप्स और वेबसाइट्स को लेकर बाजार में उतरेंगे, इस पर निवेशकों और टेक विश्लेषकों की नजर रहेगी।