भारत का लक्ष्य 3‑7 नैनोमीटर चिप प्रौद्योगिकी पर आठ साल में

भारत सरकार ने हाल ही में घोषणा की है कि वह 3 से 7 नैनोमीटर (nm) के चिप तकनीक पर पहुँचने का लक्ष्य रखती है, और यह लक्ष्य Semicon 2.0 पहल के तहत अगले आठ वर्षों में पूरा करने का है। यह कदम देश की सेमीकंडक्टर उद्योग को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के साथ तालमेल बिठाने के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है। भारत 3-7 nm चिप प्रौद्योगिकी से जुड़ी यह जानकारी इस विषय को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।

भारत 3-7 nm चिप प्रौद्योगिकी: क्या है और क्यों महत्वपूर्ण है?

Semicon 2.0 का महत्व

Semicon 2.0 भारत की नई नीति है जिसका उद्देश्य देश में सेमीकंडक्टर निर्माण क्षमताओं को बढ़ाना और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एक मजबूत भूमिका निभाना है। इस नीति के तहत, सरकार ने विभिन्न प्रोत्साहन योजनाएँ, कर लाभ, और अनुसंधान एवं विकास के लिए फंडिंग की व्यवस्था की है। 3‑7 nm तकनीक पर पहुँचने से भारतीय कंपनियाँ अधिक उन्नत इंटीग्रेटेड सर्किट्स बना सकेंगी, जिससे ऑटोमोटिव, एयरोस्पेस और हाई-परफॉरमेंस कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में नई संभावनाएँ खुलेंगी।

ट्रांज़िस्टर का छोटा आकार

3‑7 nm चिप प्रौद्योगिकी का मतलब है कि ट्रांज़िस्टर के आकार को 3 से 7 नैनोमीटर के बीच लाना, जो आज की 10‑nm और 7‑nm प्रक्रियाओं से भी अधिक उन्नत है। इस तरह के छोटे ट्रांज़िस्टर से ऊर्जा दक्षता बढ़ती है और प्रोसेसिंग पावर में सुधार होता है। भारत का यह लक्ष्य वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए आवश्यक माना जा रहा है।

उद्योग के लिए संभावित लाभ

इस लक्ष्य को प्राप्त करने से भारतीय स्टार्ट‑अप्स और बड़े फर्मों को अपनी उत्पादन क्षमताओं को उन्नत करने का मौका मिलेगा। इसके अलावा, यह विदेशी निवेश को आकर्षित कर सकता है, क्योंकि वैश्विक कंपनियाँ भारत में उन्नत निर्माण सुविधाओं के लिए सहयोग करना चाहेंगी। इससे रोजगार सृजन, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, और घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को मजबूती मिलेगी।

आगामी कदम

सरकार ने अगले कुछ वर्षों में अनुसंधान केंद्रों और उत्पादन संयंत्रों के लिए आवश्यक बुनियादी ढाँचे का निर्माण करने की योजना बनाई है। साथ ही, शैक्षणिक संस्थानों के साथ मिलकर कुशल तकनीशियनों और इंजीनियरों की प्रशिक्षण व्यवस्था पर भी काम चल रहा है।

कुल मिलाकर, 3‑7 nm चिप प्रौद्योगिकी पर पहुँचने का भारत का लक्ष्य देश की तकनीकी स्वावलंबन को बढ़ाने और वैश्विक बाजार में अपनी पहचान बनाने का एक साहसी कदम है। Semicon 2.0 के तहत यह पहल आने वाले वर्षों में भारतीय सेमीकंडक्टर उद्योग को नई ऊँचाइयों पर ले जाने की उम्मीद है।

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मूल स्रोत: Communications Today