ग्लोबल कमोडिटी मार्केट और एनर्जी सेक्टर में इन दिनों भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई रिकवरी के बीच एक कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है। ऑयल मार्केट में हाल ही में सऊदी अरब पर हुए हमलों और इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) की तरफ से स्टॉक रिलीज किए जाने के फैसलों के बीच कीमतों में उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया है। बुधवार को क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई, क्योंकि IEA के मेंबर देशों ने बढ़ते फ्यूल प्राइस को नियंत्रित करने के लिए डीजल स्टॉक को प्राथमिकता के आधार पर रिलीज करने का समझौता किया। हालांकि, इस हालिया करेक्शन से पहले सेशन के शुरुआती घंटों में सऊदी अरब पर ईरान समर्थित हाउती मिलिटेंट्स के हमलों की वजह से कीमतें ऊपर चली गई थीं।
what changed: क्रूड ऑयल मार्केट में हालिया बदलाव
बुधवार को ट्रेडिंग के दौरान क्रूड ऑयल की कीमतों में कमजोरी देखने को मिली। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स (Brent crude futures) में 38 सेंट की गिरावट आई और यह 100.20 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। इसके साथ ही, यूएस वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) फ्यूचर्स में 1.16 डॉलर की गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह 18.28 डॉलर (रिपोर्टेड: 88.28 डॉलर) प्रति बैरल परsettle हुआ। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि इस समय ऑयल मार्केट सुधरती हुई फिजिकल सप्लाई और लगातार बने हुए जियोपॉलिटिकल रिस्क के बीच फंसा हुआ है।
सऊदी अरब में सप्लाई रिकवरी के मोर्चे पर भी कुछ राहत भरी खबरें थीं। सऊदी एनर्जी मिनिस्टर प्रिंस अब्दुलअजीज बिन सलमान के अनुसार, मंगलवार सुबह तक ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के जरिए 5.8 मिलियन बैरल ऑयल की सप्लाई फिर से शुरू हो चुकी थी। सितंबर की शुरुआत में ड्रोन हमलों से इस पाइपलाइन को नुकसान पहुंचा था, जिसके बाद इसे बंद करना पड़ा था।
key benefits: डीजल स्टॉक रिलीज और IEA की भूमिका
मार्केट में फ्यूल की बढ़ती कीमतों और सप्लाई की तंगी को दूर करने के लिए इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने कड़े कदम उठाए हैं। IEA मेंबर देशों ने मार्च के इमरजेंसी एक्शन प्लान के तहत अब तक लगभग 325 मिलियन बैरल ऑयल मार्केट में उतारा है। इस प्लान के तहत अभी भी लगभग 100 मिलियन बैरल ऑयल अनरिएलिस्ड बचा हुआ है।
इसके अलावा, G7 देशों ने ट्रंप प्रशासन के दबाव में आकर डीजल स्टॉक को रिलीज करने पर सहमति जताई है। IEA मेंबर देशों के पास अभी भी 1.1 बिलियन बैरल के बराबर इमरजेंसी स्टॉक मौजूद है, जिसमें 200 मिलियन बैरल से ज्यादा केवल डीजल शामिल है। अधिकारियों का कहना है कि अगर जरूरत पड़ी तो बाजार में इन स्टॉक का और अधिक हिस्सा रिलीज किया जा सकता है, हालांकि यह अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि कुल कितना डीजल डिप्लॉय किया जाएगा।
risks or limitations: हाउती हमलों का बढ़ता खतरा
सप्लाई रिकवरी की इन कोशिशों के बावजूद जियोपॉलिटिकल टेंशन कम होने का नाम नहीं ले रही है। सत्र की शुरुआत में सऊदी अरब पर यमन के ईरान समर्थित हाउती मिलिटेंट्स द्वारा किए गए ताजा हमलों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। सऊदी एविएशन अथॉरिटी के अनुसार, जazan और नजरां के एयरपोर्ट्स को दो अलग-अलग हमलों में निशाना बनाया गया था।
विशेषज्ञों का मानना है कि हाउती मिलिटेंट्स की तरफ से सीमा से सैकड़ों किलोमीटर दूर स्थित ऑयल फैसिलिटीज़ को निशाना बनाने की क्षमता बनी हुई है। इससे बड़े पैमाने पर क्रूड सप्लाई में रुकावट आने का जोखिम लगातार उच्च स्तर पर बना हुआ है। यदि हाउती विद्रोहियों को जमीन के नुकसान के कारण ज्यादा दबाव बनाने की जरूरत महसूस हुई, तो ये जोखिम और भी ज्यादा गंभीर हो सकते हैं। इसके अलावा, ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले टैंकर्स पर हमले तेज करने की कोशिशों ने भी ट्रेडर्स के बीच ऑयल सप्लाई को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।
business implications और सेक्टर पर असर
एनर्जी सेक्टर और ग्लोबल फाइनेंस मार्केट के लिए यह स्थिति काफी संवेदनशील है। एक तरफ जहां अमेरिका और G7 देशों के प्रशासनिक दबाव के चलते स्टॉक रिलीज से कीमतों पर लगाम लगाने की कोशिश की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष कंपनियों और निवेशकों के लिए अनिश्चितता पैदा कर रहे हैं।
जायेद कैपिटल मार्केट्स (Zaye Capital Markets) और XS.com जैसे वित्तीय संस्थानों के विश्लेषकों (जैसे नईम असलम और समेर हसन) का भी यही मानना है कि मार्केट इस समय सप्लाई सुधार और भू-राजनीतिक अस्थिरता के दोहरे प्रभाव से गुजर रहा है। जब तक रणनीतिक समुद्री मार्गों और पाइपलाइन बुनियादी ढांचे पर हमलों का खतरा टलता नहीं है, तब तक कीमतों में स्थिरता आना मुश्किल नजर आता है।
what to watch next: आगे क्या देखना होगा
आने वाले दिनों में निवेशकों और बाजार विश्लेषकों की नजरें मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर रहेंगी:
- IEA और G7 देशों द्वारा डीजल और क्रूड ऑयल के इमरजेंसी स्टॉक को रिलीज करने की अगली खेप।
- सऊदी अरब के इन्फ्रास्ट्रक्चर, विशेषकर पाइपलाइनों और एविएशन सेंटर्स पर सुरक्षा उपायों की स्थिति।
- स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज और यमन सीमा के पास हाउती मिलिटेंट्स की गतिविधियों में उतार-चढ़ाव।
- ग्लोबल फ्यूल मार्केट्स में कीमतों का रुख और रिफाइनिंग Margins की स्थिति।
इन सभी कारकों के आधार पर ही आने वाले हफ्तों में क्रूड ऑयल की दिशा तय होगी।
