Starbucks sugar-free lawsuit: शुगर-फ्री प्रोटीन ड्रिंक्स में चीनी मिलने के आरोप पर क्लास एक्शन मुकदमा

Starbucks sugar-free lawsuit: बेवरेज लेबलिंग पर कानूनी विवाद

ग्लोबल कॉफी चेन Starbucks के खिलाफ अमेरिका के सिएटल स्थित फेडरल कोर्ट में एक क्लास एक्शन मुकदमा दायर किया गया है। इस Starbucks sugar-free lawsuit में आरोप लगाया गया है कि कंपनी अपने आठ प्रोटीन ड्रिंक्स को ‘शुगरलेस’ या ‘शुगर-फ्री’ के रूप में प्रमोट करती है, जबकि वास्तव में इनमें उल्लेखनीय मात्रा में चीनी मौजूद होती है। वादी पक्ष का कहना है कि यह लेबलिंग उपभोक्ताओं को गुमराह करती है और फेडरल लेबलिंग रेगुलेशंस का उल्लंघन करती है।

यह कानूनी कार्रवाई लॉ फर्म Hagens Berman द्वारा कैलिफोर्निया, न्यूयॉर्क और वाशिंगटन के तीन उपभोक्ताओं की ओर से दर्ज की गई है। इन उपभोक्ताओं ने इन तीनों अमेरिकी राज्यों में Starbucks के ये ड्रिंक्स खरीदे थे। याचिका में अमेरिकी उपभोक्ताओं के लिए वित्तीय हर्जाने (damages) की मांग की गई है और साथ ही कोर्ट से एक स्थायी निषेधाज्ञा (injunction) जारी करने की अपील की गई है, जिससे Starbucks को चीनी वाले किसी भी प्रोडक्ट पर ‘शुगर-फ्री’ शब्द का उपयोग करने से रोका जा सके।

मुकदमे की पृष्ठभूमि और मुख्य आरोप

मुकदमे में कहा गया है कि Starbucks द्वारा इन प्रोडक्ट्स का नामकरण और मार्केटिंग “झूठा, भ्रामक और गैरकानूनी” (false, deceptive and unlawful) है। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, जब कोई उपभोक्ता किसी प्रोडक्ट पर ‘शुगर-फ्री’ लेबल देखता है, तो वह यह मानकर चलता है कि उस बेवरेज में किसी भी प्रकार की चीनी मौजूद नहीं है।

लॉ फर्म और याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया: “उपभोक्ता विभिन्न कारणों से चीनी से परहेज करते हैं, चाहे वह सामान्य स्वास्थ्य हो, डायबिटीज और ब्लड ग्लूकोज का स्तर हो या अन्य कारक हों, और कई लोगों के लिए इस तरह की गंभीर गलत लेबलिंग (staunch mislabeling) बेहद महत्वपूर्ण और नुकसानदेह है।”

याचिका में दावा किया गया है कि Starbucks के कुछ तथाकथित ‘शुगर-फ्री’ प्रोटीन ड्रिंक्स में एक Reese’s पीनट बटर कप से भी अधिक चीनी होती है। संदर्भ के लिए, एक Reese’s कप में लगभग 11 ग्राम चीनी होती है, जबकि Starbucks के मेन्यू पर लिस्टेड कुछ ड्रिंक्स में इससे कहीं ज्यादा मात्रा दर्ज की गई है।

पोषण संबंधी आंकड़े: Starbucks के अपने डेटा में क्या सामने आया?

वादी पक्ष ने अपने दावों के समर्थन में Starbucks की आधिकारिक अमेरिकी वेबसाइट पर उपलब्ध न्यूट्रिशनल डेटा का ही हवाला दिया है। वेबसाइट पर दर्ज जानकारी के मुताबिक:

  • 16-ounce Sugar-Free Caramel Protein Matcha: 16-औंस (लगभग 0.5-लीटर) के इस ड्रिंक में 16 ग्राम चीनी दर्ज की गई है।
  • 20-ounce Sugar-Free Caramel Protein Matcha: 20-औंस (लगभग 0.6-लीटर) साइज के इस ड्रिंक में 21 ग्राम चीनी बताई गई है।
  • 16-ounce Iced Starbucks Sugar-Free Caramel Protein Latte: इस ड्रिंक में 9 ग्राम चीनी और 29 ग्राम प्रोटीन की मात्रा दर्ज है।

मुकदमे के अनुसार, 21 ग्राम या 16 ग्राम चीनी वाले ड्रिंक को ‘शुगर-फ्री’ नाम के साथ बेचना उन उपभोक्ताओं के लिए भारी जोखिम पैदा करता है जो स्वास्थ्य कारणों या डायबिटीज जैसी मेडिकल स्थितियों के चलते सख्त लो-शुगर या नो-शुगर डाइट का पालन करते हैं।

Starbucks का पक्ष: प्राकृतिक मिठास और सिरप का तर्क

Starbucks ने इन आरोपों को पूरी तरह से खारिज करते हुए कहा है कि इस कानूनी मुकदमे के दावों में कोई दम नहीं है। कंपनी के एक आधिकारिक बयान के अनुसार, “हमारा मानना है कि इन दावों का कोई आधार नहीं है (these claims have no merit)। Starbucks ने प्रोडक्ट अनाउंसमेंट्स, मेन्यू, मार्केटिंग मैटेरियल्स, Starbucks.com और Starbucks app पर अपने प्रोटीन बेवरेजेस, शुगर-फ्री ऑप्शंस, कस्टमाइज़ेशन चॉइस और न्यूट्रिशनल कंटेंट के बारे में लगातार और स्पष्ट रूप से जानकारी दी है, और हम इस मामले में मजबूती से अपना बचाव करने का इरादा रखते हैं।”

कंपनी ने यह स्पष्टीकरण भी दिया है कि इन ड्रिंक्स में मौजूद चीनी कंपनी द्वारा अलग से नहीं मिलाई जाती। Starbucks के अनुसार:

  • ड्रिंक्स में मौजूद चीनी प्रोटीन-बूस्टेड दूध (protein-boosted milk) से प्राकृतिक रूप से आती है।
  • कंपनी पेय पदार्थों में अतिरिक्त चीनी (added sugar) नहीं मिलाती है।
  • इन बेवरेजेस में मिठास के स्वाद के लिए शुगर-फ्री फ्लेवरिंग सिरप (sugar-free flavoring syrup) का इस्तेमाल किया जाता है।

कंपनी का तर्क है कि चूंकि ड्रिंक में उपयोग किया गया फ्लेवरिंग सिरप शुगर-फ्री है और इसमें कोई अतिरिक्त टेबल शुगर नहीं मिलाई गई है, इसलिए उसने ग्राहकों को भ्रमित करने का प्रयास नहीं किया है। हालांकि, वादी पक्ष का कहना है कि ड्रिंक के अंतिम रूप में चीनी की मौजूदगी के बावजूद मुख्य शीर्षक में ‘शुगर-फ्री’ लिखना सीधे तौर पर उपभोक्ताओं को धोखे में रखता है।

प्रोटीन बेवरेज मार्केट और प्रतिस्पर्धी परिदृश्य

Starbucks ने अपने प्रोटीन बेवरेज पोर्टफोलियो को सितंबर 2025 में लॉन्च किया था। यह कदम कॉफी और बेवरेज इंडस्ट्री में प्रोटीन युक्त विकल्पों की बढ़ती मांग को भुनाने के उद्देश्य से उठाया गया था। फिटनेस और वेलनेस ट्रेंड्स के चलते कई बेवरेज ब्रांड्स अपने मेन्यू में हाई-प्रोटीन और लो-शुगर ड्रिंक्स जोड़ रहे हैं।

Starbucks की प्रमुख प्रतिद्वंद्वी कॉफी चेन Dutch Bros ने इससे पहले वर्ष 2024 में प्रोटीन-एन्हांस्ड कॉफी ड्रिंक्स पेश किए थे। Dutch Bros के लाइनअप में शामिल 16-औंस आइस्ड Hopscotch Zero Sugar Added Protein Latte में 7 ग्राम चीनी और 11 ग्राम प्रोटीन शामिल है। ध्यान देने योग्य बात यह है कि Dutch Bros ने अपनी ब्रांडिंग में ‘Zero Sugar Added’ (कोई अतिरिक्त चीनी नहीं जोड़ी गई) शब्द का उपयोग किया, जबकि Starbucks ने अपने ड्रिंक्स के नाम में सीधे ‘Sugar-Free’ शब्द का प्रयोग किया, जो अब विवाद का मुख्य केंद्र बन गया है।

कानूनी और नियामकीय निहितार्थ

इस मुकदमे के नतीजे बेवरेज और पैकेज्ड फूड इंडस्ट्री के लिए दूरगामी साबित हो सकते हैं। फेडरल लेबलिंग रेगुलेशंस के तहत ‘Sugar-Free’ और ‘No Added Sugar’ के बीच एक स्पष्ट कानूनी अंतर होता है:

1. ‘Sugar-Free’ बनाम ‘No Added Sugar’ का विवाद

रेगुलेटरी नियमों के अनुसार, किसी भी प्रोडक्ट को ‘शुगर-फ्री’ तभी कहा जा सकता है जब उसमें प्रति सर्विंग चीनी की मात्रा नगण्य हो। यदि किसी प्रोडक्ट में प्राकृतिक रूप से मौजूद चीनी (जैसे दूध में मौजूद लैक्टोज) है, तो उसे आमतौर पर ‘नो एडेड शुगर’ के रूप में लेबल किया जा सकता है, न कि पूरी तरह ‘शुगर-फ्री’। Starbucks द्वारा दूध-आधारित नेचुरल शुगर होने के बावजूद ड्रिंक के नाम में ‘शुगर-फ्री’ का इस्तेमाल करना ही वादियों के अनुसार भ्रामक है।

2. क्लास एक्शन का दायरा और मांगें

लॉ फर्म Hagens Berman द्वारा दायर यह मुकदमा केवल उन तीन ग्राहकों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन सभी अमेरिकी उपभोक्ताओं का प्रतिनिधित्व करने की मांग करता है जिन्होंने ये ड्रिंक्स खरीदे हैं। याचिका में कोर्ट से दो मुख्य राहतें मांगी गई हैं:

  • प्रभावित अमेरिकी उपभोक्ताओं को मुआवजा (damages)।
  • Starbucks पर चीनी युक्त किसी भी बेवरेज के लिए ‘शुगर-फ्री’ लेबल इस्तेमाल करने पर रोक लगाने वाली अदालती निषेधाज्ञा।

मुकदमे से जुड़े अनसुलझे पहलू

उपलब्ध अदालती दस्तावेजों और शोध रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में कुछ तथ्य अभी सार्वजनिक या स्पष्ट नहीं हैं:

  • याचिकाकर्ताओं द्वारा मांगी गई कुल हर्जाना राशि (monetary damages) का सटीक आंकड़ा निर्दिष्ट नहीं किया गया है।
  • मुकदमा दायर करने वाले तीनों व्यक्तिगत उपभोक्ताओं की पहचान विस्तृत रूप से उजागर नहीं की गई है।
  • मुकदमे में शामिल सभी आठ प्रोटीन बेवरेजेस के पूरे नाम स्रोत सामग्री में विस्तृत रूप से सूचीबद्ध नहीं हैं, हालांकि Sugar-Free Caramel Protein Matcha और Sugar-Free Caramel Protein Latte जैसे ड्रिंक्स प्रमुखता से उल्लिखित हैं।

उपभोक्ताओं और बेवरेज इंडस्ट्री पर प्रभाव

यह मामला उन उपभोक्ताओं के लिए बेहद प्रासंगिक है जो मेडिकल कारणों या हेल्थ लक्ष्यों के कारण शुगर इंटेक पर सख्त नजर रखते हैं। यदि कोई उपभोक्ता यह सोचकर 20-औंस का ड्रिंक पीता है कि वह पूरी तरह चीनी-मुक्त है, जबकि उसमें 21 ग्राम चीनी मौजूद है, तो यह स्वास्थ्य प्रबंधन को सीधे प्रभावित कर सकता है।

इंडस्ट्री विश्लेषकों का मानना है कि इस कानूनी चुनौती के बाद बेवरेज कंपनियों को अपनी इन-स्टोर मेन्यू बोर्डिंग, मोबाइल ऐप डिस्क्रिप्शन्स और मार्केटिंग शब्दावली की नए सिरे से समीक्षा करनी पड़ सकती है। कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि फ्लेवरिंग सिरप की विशेषताओं और ड्रिंक के समग्र पोषण प्रोफाइल के बीच कोई अंतरविरोध न हो। कोर्ट में Starbucks का बचाव और सिएटल फेडरल कोर्ट का आगामी रुख यह तय करेगा कि क्या रेस्टोरेंट और कैफे चेन्स को अपने मेन्यू लेबल्स में संशोधन करना होगा।