अक्सर हम टेक्नोलॉजी और फाइनेंस सेक्टर में बड़े बदलावों की बात करते हैं, लेकिन सरकारी नीतियों और वेलफेयर प्रोग्राम्स में होने वाले बदलाव भी सीधे तौर पर डेटा, फाइनेंस और एडमिनिस्ट्रेशन को प्रभावित करते हैं। हाल ही में सप्लीमेंट्री न्यूट्रिशन असिस्टेंस प्रोग्राम (SNAP) से जुड़ा एक बड़ा अपडेट सामने आया है, जहां State’s funding share of SNAP increased for the first time in 52 years दर्ज किया गया है। इस बदलाव से जुड़े वित्तीय और प्रशासनिक पहलुओं का असर सीधे तौर पर कई लोगों पर पड़ने वाला है।
इस रिपोर्ट में हम जानेंगे कि इस फंडिंग बदलाव, नए वर्क रिक्वायरमेंट्स और फाइनेंस पर पड़ने वाले असर के क्या मायने हैं।
क्या बदला है SNAP प्रोग्राम में?
हाल ही में लागू हुए नए नियमों के तहत, सप्लीमेंट्री न्यूट्रिशन असिस्टेंस प्रोग्राम के प्रशासनिक खर्चों (administrative costs) को मैनेज करने में स्टेट की जिम्मेदारी को बढ़ा दिया गया है। पहले यह हिस्सेदारी 50% हुआ करती थी, जिसे बढ़ाकर अब 75% कर दिया गया है। 1974 के बाद यह पहला मौका है जब इस फंडिंग शेयर में बढ़ोतरी की गई है।
इसके अलावा, महंगाई (inflation) को ध्यान में रखते हुए मिलियंस ऑफ अमेरिकन्स को 1 अक्टूबर से हर महीने आठ डॉलर यानी लगभग 3% की बढ़ोतरी के साथ लाभ मिलना शुरू हुआ है।
मुख्य लाभ और राहत
डिपार्टमेंट ऑफ हेल्थ एंड सर्विसेज (DHHS) की ओर से स्पष्ट किया गया है कि इन प्रशासनिक बदलावों के कारण किसी भी इंडिविजुअल या फैमिली के SNAP बेनिफिट्स में कोई कटौती नहीं की जा रही है।
- बढ़े हुए बेनिफिट्स: इंफ्लेशन को कवर करने के लिए यूजर्स को प्रति माह लगभग आठ डॉलर (लगभग 3% की वृद्धि) का अतिरिक्त लाभ मिल रहा है।
- हेल्पलाइन सपोर्ट: DHHS ने जानकारी दी है कि यदि किसी यूजर को अपने बेनिफिट्स को लेकर कोई भी सवाल है, तो वे 1-844-ASK-DHHS (1-844-275-3447) पर संपर्क कर सकते हैं। एजेंसी इन सभी बदलावों को संभालने और क्रिटिकल सर्विसेज को सुरक्षित रखने के लिए पूरी तरह तैयार है।
नए वर्क रिक्वायरमेंट्स और नियम
प्रशासनिक बदलावों के साथ-साथ इस योजना में नए वर्क रिक्वायरमेंट्स भी जोड़े गए हैं, जो 1 अक्टूबर से प्रभावी हो चुके हैं:
- 64 वर्ष तक की आयु के सीनियर एडल्ट्स और किशोर बच्चों (teens) के माता-पिता को अब यह साबित करना होगा कि वे हर महीने कम से कम 80 घंटे काम या वॉलेंटियर कर रहे हैं।
- इस बदलाव से लगभग 75,000 ग्रेनाइट स्टेटर्स (Granite Staters) सीधे तौर पर प्रभावित होने की संभावना है।
बिजनेस और फाइनेंस पर प्रभाव
वेलफेयर प्रोग्राम्स के एडमिनिस्ट्रेशन में जब स्टेट की हिस्सेदारी 50% से बढ़कर 75% होती है, तो इसका सीधा असर सरकारी फाइनेंस और बजट पर पड़ता है। उपलब्ध डेटा के अनुसार:
- फिस्कल ईयर 27 (fiscal year 27) में स्टेट पर इसका अनुमानित खर्च $4.5 मिलियन रहने वाला है।
- यह अनुमानित लागत आगे चलकर फिस्कल ईयर 2029 में बढ़कर $6.9 मिलियन तक पहुंच सकती है।
सेक्टर इंपैक्ट और भविष्य के संकेत
इस प्रकार के नीतिगत बदलाव यह दर्शाते हैं कि किस तरह सरकारी वित्तीय नीतियों में फेरबदल से एडमिनिस्ट्रेटिव सर्वर और डेटा मैनेजमेंट पर भी दबाव बढ़ता है। हालांकि DHHS का कहना है कि वे इन सभी बदलावों को मैनेज करने के लिए तैयार हैं, फिर भी आने वाले वित्त वर्षों में बजट आवंटन पर कड़ी नजर रखनी होगी।
आगे क्या देखना होगा?
- बजट मॉनिटरिंग: आने वाले फिस्कल इयर्स में $4.5 मिलियन से $6.9 मिलियन तक बढ़ने वाले खर्चों का स्टेट के अन्य फाइनेंस पर क्या असर होगा, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
- यूजर एक्सपीरियंस: 75,000 प्रभावित यूजर्स और नए वर्क रिक्वायरमेंट्स (80 घंटे प्रति माह) को लागू करने में एडमिनिस्ट्रेटिव ऐप या पोर्टल किस प्रकार काम करते हैं, इस पर भी नजर रहेगी।
