
भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के प्रमुख, वि. नാരായणन, ने राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस 2026 के अवसर पर अपने देश की यात्रा को याद किया, जिसमें उन्होंने साइकिल से लेकर चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव तक की प्रगति पर प्रकाश डाला। उन्होंने यह कहा कि यह यात्रा सिर्फ तकनीकी उन्नति नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन का प्रतीक है।
राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस 2026 पर स्मरण
इस वर्ष के राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस पर नാരായणन ने बताया कि भारत की अंतरिक्ष यात्रा की शुरुआत साइकिलों और बुलडॉग गाड़ियों से हुई थी। उन्होंने बताया कि 1950 के दशक में भारत ने अपनी पहली अंतरिक्ष कार्यक्रम की नींव रखी, जिसे बाद में ISRO ने 1962 में स्थापित किया।
चंद्रयान-3 और अडित्य-एल1: भारतीय चिप्स की भूमिका
नारायणन ने यह भी रेखांकित किया कि भारतीय चिप्स ने चंद्रयान-3 और अडित्य-एल1 मिशनों को सक्षम बनाया है। उन्होंने उल्लेख किया कि इन मिशनों में इस्तेमाल किए गए चिप्स पूरी तरह से भारतीय डिज़ाइन और निर्माण के हैं, जिससे भारत की आत्मनिर्भरता को मजबूती मिली है।
प्रधानमंत्री मोदी का दृष्टिकोण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अंतरिक्ष क्षेत्र में युवा प्रतिभाओं को आकर्षित करने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने स्टार्टअप्स को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए प्रेरित किया और कहा कि भारत को अंतरिक्ष प्रतिभा के लिए एक आकर्षक वातावरण बनाना चाहिए।
विश्वास और मजबूत प्रणालियाँ
डेक्कन क्रॉनिकल के एक लेख के अनुसार, नारीयनन ने अंतरिक्ष कार्यक्रम की सफलता के लिए विश्वास और मजबूत प्रणालियों की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विश्वसनीय डेटा और सुदृढ़ प्रणालियाँ भारत को अंतरिक्ष में विश्वसनीय साझेदार बनाती हैं।
सैटेलाइट्स का भविष्य
सैटेलाइट्स ने भारत के अंतरिक्ष भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। नारीयनन ने बताया कि सैटेलाइट्स के माध्यम से जलवायु निगरानी, आपदा प्रबंधन और संचार सेवाएँ बेहतर हो रही हैं।
राष्ट्रीय अंतरिक्ष बैठक 2.0 और 2047 का दृष्टिकोण
पीआईबी के एक रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय अंतरिक्ष बैठक 2.0 ने 2047 तक भारत के विकास के लिए अंतरिक्ष अनुप्रयोगों का एक रोडमैप प्रस्तुत किया। इस रोडमैप में सैटेलाइट इकोसिस्टम, अंतरिक्ष आधारित सेवाएँ और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को प्रमुखता दी गई है।
बुलडॉग गाड़ियों से चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव तक
टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, नारीयनन ने बुलडॉग गाड़ियों से लेकर चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव तक की यात्रा पर गर्व व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह प्रगति भारत की वैज्ञानिक क्षमता और दृढ़ संकल्प को दर्शाती है।
भविष्य के लिए प्रतिबद्धता
नारीयनन ने यह भी कहा कि ISRO भविष्य में और भी बड़े लक्ष्यों को हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है, जैसे कि मंगल पर मानवयुक्त मिशन और अंतरिक्ष पर्यटन। उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय तकनीक और नवाचार इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
इस प्रकार, नारीयनन के शब्दों ने भारत की अंतरिक्ष यात्रा की गाथा को संक्षेप में प्रस्तुत किया, जो साइकिल और बुलडॉग गाड़ियों से लेकर चंद्रमा और उससे आगे तक की यात्रा को दर्शाती है। यह कहानी भारतीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी की उपलब्धियों का एक प्रेरणादायक उदाहरण है।