तकनीकी और वित्तीय बाजारों में इन दिनों एक बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या उभरती हुई एआई तकनीक ऐपल के पेमेंट और ऐप स्टोर मॉडल को नुकसान पहुंचा सकती है? हाल ही में सीएनबीसी के ‘फास्ट मनी’ कार्यक्रम में ट्रेडर्स के बीच इस बात पर तीखी बहस हुई कि क्या मेटा प्लेटफॉर्म्स इंक का ‘म्यूज’ (Muse) प्रोजेक्ट ऐपल इंक के सर्विसेज बिजनेस पर दबाव बना सकता है। बैंक ऑफ अमेरिका ने पहले ही यह चेतावनी जारी की है कि आने वाले समय में एआई एजेंट्स यूज़र्स के लिए सीधे ट्रांजैक्शन कर सकते हैं और इस प्रक्रिया में ऐप स्टोर को पूरी तरह से बाईपास किया जा सकता है।
क्या बदला है बाजार में?
हालिया वित्तीय आंकड़ों और बाजार के रुझानों पर नजर डालें तो मेटा प्लेटफॉर्म्स ने पिछले एक महीने में लगभग 30% की बढ़त हासिल की है, जबकि इसी अवधि में ऐपल के शेयरों में 2% की मामूली तेजी देखी गई है। प्री-मार्केट ट्रेडिंग के दौरान, मेटा के शेयर 0.11% की गिरावट के साथ 738.00 डॉलर पर कारोबार कर रहे थे, वहीं ऐपल के शेयर 0.24% की बढ़त के साथ 330.18 डॉलर पर देखे गए। एआई के क्षेत्र में हो रहे इन बदलावों के बीच विश्लेषक इस बात का आकलन कर रहे हैं कि तकनीक दिग्गजों के बीच प्रतिस्पर्धा का यह नया दौर किस दिशा में आगे बढ़ेगा।
बैंक ऑफ अमेरिका की चेतावनी और एआई एजेंट्स
बैंक ऑफ अमेरिका ने ऐपल के लिए अपना ‘बाय’ (Buy) रेटिंग कायम रखा है और कंपनी के हार्डवेयर और डिवाइसेस बाजार में मजबूत स्थिति की सराहना की है। हालांकि, बैंक ने यह चेतावनी भी दी है कि एआई एजेंट्स भविष्य में यूज़र्स की तरफ से सीधे तौर पर ट्रांजैक्शन संचालित कर सकते हैं। इसका मतलब यह है कि यूज़र्स को किसी ऐप या ऐप स्टोर के जरिए भुगतान करने की अनिवार्यता कम हो सकती है, जिससे सीधे तौर पर ऐपल के इकोसिस्टम से कुछ ट्रांजैक्शन दूर हो सकते हैं।
क्या म्यूज बनेगा प्रमुख एआई एजेंट?
चर्चा के दौरान सीएनबीसी पर कंट्रीब्यूटर कोर्टनी ने स्पष्ट किया कि जोखिम वास्तविक है, लेकिन यह सवाल अभी भी बना हुआ है कि क्या अंततः मेटा का म्यूज ही प्रमुख एआई एजेंट के रूप में उभरेगा या नहीं। उन्होंने बताया कि ऐपल पहले से ही ऑन-डिवाइस एआई पर काम कर रहा है, जबकि म्यूज को ओपनएआई और अन्य प्लेटफॉर्म्स से कड़ी टक्कर मिल रही है।
बिजनेस इम्प्लिकेशन और ऐप स्टोर इकोनॉमिक्स
विशेषज्ञों के सामने एक और बड़ा सवाल यह है कि म्यूज जैसी तकनीक ऐप स्टोर की इकोनॉमिक्स को कितना नुकसान पहुंचा सकती है। तथ्य यह है कि ऐपल ऐप स्टोर की सभी गतिविधियों पर कमीशन नहीं कमाता है; इसका एक बड़ा हिस्सा मुख्य रूप से गेमिंग और इन-गेम परचेज से आता है। इसके विपरीत, मेटा का म्यूज उन ट्रांजैक्शन्स को अधिक आसानी से संभाल सकता है जैसे कि फूड डिलीवरी और एयरलाइन बुकिंग, जिन क्षेत्रों में ऐपल आमतौर पर कोई कमीशन नहीं इकट्ठा करता है।
इसके अलावा, मेटा की एंटरप्राइज़ महत्वाकांक्षाओं और मोंगोडिएबी (MongoDB) के सीईओ की भर्ती ने इस बात को बल दिया है कि म्यूज भविष्य में व्यावसायिक गतिविधियों में और गहरी पैठ बना सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि जैसे-जैसे मेटा अपने विज्ञापन के अलावा एआई ग्रोथ स्ट्रेटजी का विस्तार कर रहा है, इसमें मल्टी-बिलियन-डॉलर सब्सक्रिप्शन की अपार संभावनाएं छिपी हैं।
जोखिम और सीमाएं
हालाँकि यह परिकल्पना दिलचस्प है कि एआई एजेंट्स चेकआउट प्रक्रिया से ऐपल को बाहर कर सकते हैं, लेकिन व्यावहारिक धरातल पर इसकी गति और प्रभाव को लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है। एक अन्य ट्रेडर ने चर्चा में यह सवाल उठाया कि सैद्धांतिक रूप से यह मॉडल ठीक लग सकता है, लेकिन क्या यह वर्तमान में उतनी तेजी से जमीन पर उतर पाएगा। यह स्पष्ट नहीं है कि म्यूज कितनी जल्दी ऐपल के सर्विसेज रेवेन्यू को बाधित कर पाएगा या क्या अंततः मेटा ही इस अवसर को पूरी तरह भुनाने में सफल होगा।
आगे क्या देखना होगा
आने वाले महीनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि टेक कंपनियां किस प्रकार अपनी एआई रणनीतियों को आगे बढ़ाती हैं। क्या ऑन-डिवाइस एआई के जरिए ऐपल अपने यूज़र्स को अपने इकोसिस्टम में बांधे रखने में कामयाब होगा, या फिर मेटा का म्यूज और अन्य एआई एजेंट्स डिजिटल ट्रांजैक्शन की दुनिया में एक नया मुकाम हासिल करेंगे? निवेशकों और विश्लेषकों की निगाहें इन दोनों दिग्गजों के अगले कदमों पर टिकी हुई हैं।
