ग्लोबल मार्केट में इन दिनों एनर्जी सेक्टर को लेकर बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। ग्लोबल डीजल संकट गहराने के साथ ही अमेरिका और यूरोपीय देशों के बीच स्ट्रैटेजिक रिजर्व से डीजल रिलीज करने को लेकर गंभीर चर्चाएं चल रही हैं। खुदरा बाजार में कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं और सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ गया है।
इस रिपोर्ट में हम जानेंगे कि किस तरह से रिफाइनरी क्षमता में कमी, ग्लोबल डिमांड और राजनीतिक बयानों ने इस एनर्जी मार्केट को प्रभावित किया है।
क्या बदला है एनर्जी मार्केट में?
वर्तमान में रिटेल डीजल की कीमतें काफी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। आंकड़े बताते हैं कि डीजल औसतन $6.37 प्रति गैलन के आसपास चल रहा है, जो कि 22 सितंबर को दर्ज किए गए $6.53 के रिकॉर्ड हाई से थोड़ा कम है, लेकिन एक साल पहले के $3.70 के मुकाबले लगभग 72% ज्यादा है। वहीं, रेगुलर पेट्रोल औसतन करीब $4.40 प्रति गैलन पर बिक रहा है।
डिफाइनिंग मार्जिन या डीजल क्रैक स्प्रेड भी $100 प्रति बैरल के पार कारोबार कर रहा है। इसके अलावा WTI क्रूड ऑयल की कीमतें 80 डॉलर के ऊपरी स्तर पर बनी हुई हैं। अमेरिका रोजाना लगभग 1.2 से 1.5 मिलियन बैरल डीजल का एक्सपोर्ट करता है और हालिया महीनों में अमेरिका ने यूरोप के डीजल आयात का आधे से ज्यादा हिस्सा सप्लाई किया है।
रिफाइनरी क्षमता में कमी और सप्लाई चेन की चुनौतियां
सप्लाई के मोर्चे पर पिछले कुछ वर्षों में रिफाइनरी क्षमता में बड़ी गिरावट आई है। LyondellBasell ने 2025 में अपना ह्यूस्टन रिफाइनरी बंद कर दिया, जिससे रोजाना करीब 264,000 बैरल की क्षमता कम हो गई। इसके बाद Phillips 66 ने भी 2025 के अंत में अपने लॉस एंजिल्स रिफाइनरी में क्रूड रन रोक दिए, जिससे लगभग 139,000 बैरल प्रतिदिन की क्षमता प्रभावित हुई। इसके अलावा Valero ने 2026 में अपनी बेनिस रिफाइनरी को आइडल कर दिया। स्कॉटलैंड की एकमात्र ग्रेसमथ रिफाइनरी भी 2025 में बंद हो गई।
इन तमाम कारणों से अमेरिकी रिफाइनरी वर्तमान में मिड-टू-हाई 90 के दशक के यूटिलाइजेशन रेट पर काम कर रही हैं, जिससे बफर क्षमता काफी सीमित हो गई है।
राजनीतिक दबाव और संभावित एक्सपोर्ट बैन
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) की बैठकों से जुड़े सूत्रों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने फ्रांस और जर्मनी पर डीजल होर्डिंग का आरोप लगाते हुए यूरोपीय नेताओं पर दबाव बनाया कि वे रिजर्व से 50 मिलियन बैरल डीजल और पेट्रोल रिलीज करें। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने संकेत दिया है कि वह अमेरिकी डीजल एक्सपोर्ट पर बैन लगाने के बारे में ‘सोच रहे हैं’।
उधर, अमेरिकी एनर्जी सेक्रेटरी क्रिस राइट का मानना है कि blanket export ban एक ऐसा blunt tool है जो काम नहीं करता। उनका प्रयास है कि यूरोपीय देश अपने स्ट्रैटेजिक स्टॉक से लगभग 120 मिलियन बैरल डीजल 180 दिनों के भीतर रिलीज करें ताकि अमेरिका को एक्सपोर्ट बैन लागू करने से बचाया जा सके। हालांकि, EU ट्रेड कमिश्नर मारोस सेफकोविक ने स्पष्ट किया है कि यूरोप एक्सपोर्ट बैन की बात से हैरान है और वे द्विपक्षीय दबाव के बजाय समन्वय, एक साझा दृष्टिकोण और IEA-समन्वित प्रतिक्रिया चाहते हैं।
बिजनेस और सेक्टर इम्प्लीकेशन्स
Wood Mackenzie के विश्लेषण के अनुसार, यदि अमेरिका डीजल एक्सपोर्ट पर बैन लगाता है, तो इससे गल्फ कोस्ट का स्टोरेज तेजी से भर जाएगा, रिफाइनर्स को क्रूड रन घटाने पर मजबूर होना पड़ेगा, पेट्रोल का आयात बढ़ाना पड़ेगा और सप्लाई का यह दर्द पेट्रोल तक फैल जाएगा। हार्वेस्ट सीजन और विंटर हीटिंग ऑयल सीजन के नजदीक आने के कारण मार्केट में इस डीजल को लाना बेहद जरूरी माना जा रहा है।
गैस स्टोरेज और अन्य आंकड़े
U.S. Energy Information Administration (EIA) की रिपोर्ट के अनुसार, 25 सितंबर को समाप्त सप्ताह में वर्किंग गैस स्टोरेज 64 Bcf बढ़कर 3,415 Bcf पर पहुंच गया। वर्तमान नेचुरल गैस स्टोरेज पिछले साल की तुलना में 138 Bcf (3.9%) नीचे है, लेकिन पांच साल के औसत 3,336 Bcf से 79 Bcf (2.4%) ऊपर है। सॉल्ट कैवर्न स्टोरेज पिछले साल के स्तर से 27.3% और पांच साल के औसत से 15.5% नीचे चल रहा है।
आगे क्या देखना होगा?
फिलहाल इस बात पर अनिश्चितता बनी हुई है कि G7 नेता अगले कदमों को अंतिम रूप देने के लिए कोई बैठक करेंगे या नहीं। साथ ही, यूरोपीय देश और IEA सदस्य इन प्रस्तावित रिजर्व रिलीज को औपचारिक रूप से मंजूरी देकर लागू करते हैं या नहीं, यह भी देखना बाकी है। ट्रंप प्रशासन का एक्सपोर्ट बैन पर अंतिम फैसला क्या होगा और गल्फ में मौसम संबंधी विकास नेचुरल गैस प्रोडक्शन को कैसे प्रभावित करेंगे, इन सभी सवालों पर ग्लोबल एनर्जी मार्केट की पैनी नजर बनी हुई है।
