संसद में एक MP ने भारत और इज़राइल के बीच स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में गहरे सहयोग की माँग की है। यह कदम भारत के उभरते मेडिकल डिवाइस और डायग्नोस्टिक सेक्टर को नई ऊर्जा देने के उद्देश्य से उठाया गया है। India Israel health technology collaboration से जुड़ी यह जानकारी इस विषय को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
India Israel health technology collaboration: क्या है और क्यों महत्वपूर्ण है?
क्यों ज़रूरी है भारत-इज़राइल स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी सहयोग?
इज़राइल को विश्व में चिकित्सा उपकरण और बायोटेक्नोलॉजी के अग्रणी देशों में से एक माना जाता है। वहीं, भारत का हेल्थ टेक मार्केट 2025 तक 60 बिलियन डॉलर से अधिक होने का अनुमान है। इस बढ़ते बाजार में इज़राइल की उन्नत तकनीक और भारतीय निर्माण क्षमता का मेल दोनों पक्षों के लिए लाभकारी हो सकता है।
फ्यूजन बायोप्सी: एक उभरता हुआ क्षेत्र
भारत के फ्यूजन बायोप्सी मार्केट का अनुमान है कि यह 23.3 मिलियन डॉलर तक पहुँच जाएगा। फ्यूजन बायोप्सी, जिसमें इमेजिंग और सर्जिकल टूल्स को एकीकृत किया जाता है, कैंसर की पहचान और उपचार में क्रांतिकारी बदलाव लाया है। इज़राइल में इस क्षेत्र में कई स्टार्टअप्स और स्थापित कंपनियाँ सक्रिय हैं, जो उन्नत प्रोसेसिंग एल्गोरिदम और उच्च-परिशुद्धता उपकरण विकसित कर रही हैं।
MP का कहना है कि अगर भारत और इज़राइल मिलकर इस तकनीक पर काम करें तो भारत में कैंसर स्क्रीनिंग और ट्रीटमेंट के लिए लागत घटेगी और रोगी के अनुभव में सुधार होगा।
कृषि प्रौद्योगिकी में भी सहयोग की चर्चा
हाल ही में, दक्शिना कन्नड़ के MP कैप्टन ब्रिजेश चौटा ने इज़राइल के साथ सतत कृषि के लिए तकनीकी सहयोग की माँग की है। इज़राइल की ड्रिप इरिगेशन, स्मार्ट फार्मिंग और फसल सुरक्षा में अग्रणी तकनीकें भारत की कृषि उत्पादन क्षमता बढ़ाने में सहायक हो सकती हैं। यह दोनों देशों के बीच टेक्नोलॉजी एक्सचेंज का एक और उदाहरण है।
संसद में उठे मुद्दे और अपेक्षित परिणाम
MP ने संसद में यह रेखांकित किया कि भारत-इज़राइल के बीच स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी सहयोग के लिए औपचारिक ढांचा तैयार किया जाना चाहिए। इसमें संयुक्त अनुसंधान केंद्र, संयुक्त उत्पादन लाइसेंस, और बौद्धिक संपदा के साझा नियम शामिल हो सकते हैं। MP का मानना है कि इससे भारतीय कंपनियाँ विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन सकेंगी।
इज़राइल के प्रतिनिधि भी इस पहल को सकारात्मक रूप से देख रहे हैं। इज़राइल की स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी कंपनियाँ भारतीय बाजार में अपनी उपस्थिति बढ़ाने के लिए उत्सुक हैं, खासकर फ्यूजन बायोप्सी और अन्य इमेजिंग तकनीकों में।
भविष्य की योजनाएँ और अगले कदम
संसद के इस प्रस्ताव के बाद, स्वास्थ्य मंत्रालय और इज़राइल के स्वास्थ्य एवं विज्ञान मंत्रालय के बीच एक कार्य समूह गठित किया जा सकता है। इस समूह का कार्य होगा:
- साझा अनुसंधान परियोजनाओं की पहचान
- उत्पादन सुविधाओं के लिए संयुक्त निवेश योजनाएँ
- सामान्य मानकों और नियामक प्रक्रियाओं का सामंजस्य
साथ ही, MP ने यह भी सुझाव दिया कि सरकार को स्टार्टअप्स और SMEs को प्रोत्साहित करने के लिए कर रियायतें और ग्रांट्स उपलब्ध कराए जाएँ। इससे भारतीय कंपनियाँ इज़राइली तकनीक को अपने उत्पादन में आसानी से एकीकृत कर सकेंगी।
सारांश
MP द्वारा उठाई गई यह पहल भारत और इज़राइल के बीच स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में गहरे सहयोग के लिए एक नया मोर्चा खोलती है। फ्यूजन बायोप्सी जैसे उभरते क्षेत्रों में इज़राइल की विशेषज्ञता और भारत की विशाल बाजार क्षमता दोनों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। साथ ही, कृषि तकनीक में भी सहयोग की चर्चा से दोनों देशों के बीच तकनीकी साझेदारी का दायरा बढ़ रहा है।
इस कदम से भारतीय स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी उद्योग को नई ऊँचाइयाँ मिल सकती हैं और रोगी देखभाल की गुणवत्ता में सुधार हो सकता है।
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मूल स्रोत: Medical Buyer