OPEC+ oil production quota नवंबर के लिए 31.01 मिलियन बैरल प्रतिदिन पर स्थिर, सप्लाई और निर्यात में बड़ा अंतर

OPEC+ का फैसला: क्या बदला है?

तेल निर्यातक देशों के संगठन और उसके सहयोगियों यानी OPEC+ ने रविवार को एक अहम बैठक में यह सहमति बनाई कि नवंबर महीने के लिए उनके कच्चे तेल उत्पादन के स्तर में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। संगठन ने स्पष्ट किया है कि OPEC+ oil production quota को अक्टूबर के स्तर पर ही स्थिर रखा जाएगा। आधिकारिक व्यवस्था के तहत, इस कोटे के दायरे में आने वाले आठ प्रमुख OPEC+ सदस्य देशों के लिए अक्टूबर और नवंबर दोनों महीनों का कुल उत्पादन कोटा 31.01 मिलियन बैरल प्रतिदिन (bpd) निर्धारित किया गया है।

यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब वैश्विक ऊर्जा बाजार लगातार भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति की अनिश्चितताओं से जूझ रहा है। इससे पहले वर्ष के शुरुआती महीनों में, संगठन ने मिडिल ईस्ट में आपूर्ति की कमी की भरपाई करने के उद्देश्य से उत्पादन में की गई पूर्व कटौती को वापस लेना (unwind करना) शुरू किया था। हालांकि, जमीनी आंकड़े और आधिकारिक लक्ष्य एक-दूसरे से काफी अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं।

मिडिल ईस्ट संकट और ‘कागजी’ बहाली का विश्लेषण

चालू वर्ष के दौरान ईरान पर अमेरिका और इजरायल के युद्ध की शुरुआत के बाद स्थिति काफी जटिल हो गई थी। इस सैन्य संघर्ष के शुरू होने के चलते वैश्विक तेल व्यापार के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), में महीनों तक यातायात ठप या पंगु (paralyzed) बना रहा।

विश्लेषकों और बाजार रिपोर्टों के अनुसार, संघर्ष की शुरुआत के बाद से उत्पादन कटौती को वापस लेने की OPEC+ की अधिकांश प्रक्रिया केवल कागजों पर ही सीमित रही है। इसका मुख्य कारण Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही में आया भारी व्यवधान था। जब समुद्री मार्ग अवरुद्ध थे, तब उत्पादक देशों के लिए उत्पादन बढ़ाना और उसे अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाना व्यावहारिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया था।

अगस्त के उत्पादन आंकड़े: कोटे से काफी पीछे OPEC+

आंकड़ों पर नजर डालें तो OPEC+ का वास्तविक उत्पादन उसके आधिकारिक कोटे से काफी नीचे चल रहा है। अगस्त के महीने में, OPEC+ का वास्तविक उत्पादन गिरकर केवल 25 मिलियन बैरल प्रतिदिन रह गया था।

यदि 31.01 मिलियन बैरल प्रतिदिन के स्वीकृत कोटे से तुलना की जाए, तो अगस्त का 25 मिलियन बैरल प्रतिदिन का स्तर यह दर्शाता है कि समूह अपने तय लक्ष्य से 6.01 मिलियन बैरल प्रतिदिन पीछे था। यह भारी कमी दिखाती है कि केवल कोटा निर्धारित करने से आपूर्ति तुरंत सामान्य नहीं हो जाती, बल्कि इसके पीछे क्षेत्रीय और लॉजिस्टिकल रुकावटें एक बड़ी बाधा बनी हुई हैं।

समुद्री तेल प्रवाह और Kpler डेटा के निष्कर्ष

रायटर्स (Reuters) द्वारा उद्धृत ऊर्जा ट्रैकिंग फर्म Kpler के डेटा से मिडिल ईस्ट के तेल प्रवाह को लेकर महत्वपूर्ण आंकड़े सामने आए हैं। 1 अक्टूबर तक के सप्ताह में पूरे मिडिल ईस्ट के लिए तेल प्रवाह का सात-दिवसीय मूविंग एवरेज (7-day moving average) 18.5 मिलियन बैरल प्रतिदिन दर्ज किया गया।

Kpler का यह डेटा केवल एक मार्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें मिडिल ईस्ट के तीनों प्रमुख रणनीतिक जलक्षेत्र शामिल हैं:

  • होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz)
  • ओमान की खाड़ी (Gulf of Oman)
  • लाल सागर में स्थित बाब अल-मंदेब (Bab El-Mandeb in the Red Sea)

रिपोर्ट्स में यह संकेत दिया गया है कि Strait of Hormuz के जरिए होने वाला तेल निर्यात प्रवाह अब युद्ध-पूर्व (pre-war) स्तरों पर लौट आया है या उससे भी आगे निकल चुका है।

Giovanni Staunovo और UBS का बाजार आकलन

वित्तीय सेवा फर्म UBS के रणनीतिकार जियोवानी स्टाउनोवो (Giovanni Staunovo) ने बाजार की मौजूदा स्थिति पर अपनी राय व्यक्त की है। स्टाउनोवो के अनुसार:

“The OPEC+ group of seven kept their production ceilings unchanged, in line with market expectations. That said, despite rising flows through the Strait of Hormuz, their output levels remain well below quota.”

उन्होंने आगे रेखांकित किया कि इस स्थिति के परिणामस्वरूप तेल बाजार में कसावट बरकरार है:

“Consequently, the oil market remains tight”

विश्लेषक का यह बयान इस बात की पुष्टि करता है कि जहाजों की आवाजाही बढ़ने के बावजूद कुल उत्पादन में कोई नाटकीय उछाल नहीं आया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में आपूर्ति की स्थिति लगातार तंग बनी हुई है।

एक बड़ा विरोधाभास: निर्यात बढ़ा लेकिन उत्पादन कम क्यों?

वर्तमान स्थिति में ऊर्जा अर्थशास्त्रियों के सामने सबसे बड़ा अनसुलझा सवाल यह है कि यदि Strait of Hormuz से निकलने वाला तेल प्रवाह युद्ध-पूर्व स्तर को पार कर चुका है, तो फिर OPEC+ का उत्पादन अपने कोटे से इतना नीचे क्यों बना हुआ है?

बाजार विशेषज्ञों ने इस अंतर को समझने के लिए कुछ संभावित कारण (speculative possibilities) सामने रखे हैं, हालांकि इनमें से किसी की भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है:

1. स्टोरेज से निकासी (Storage Releases)

एक संभावना यह जताई जा रही है कि उत्पादक देशों ने नए कुओं से उत्पादन बढ़ाने के बजाय अपने मौजूदा भंडारण भंडारों (storage inventories) से तेल निकालकर निर्यात किया हो। इससे कुओं से निकलने वाला दैनिक उत्पादन बढ़े बिना ही बंदरगाहों और जलडमरूमध्य से गुजरने वाले टैंकरों का प्रवाह बढ़ सकता है।

2. घरेलू खपत के बजाय निर्यात को प्राथमिकता (Higher Export Allocations)

दूसरी संभावना यह व्यक्त की गई है कि उत्पादक देशों ने कुल उत्पादन को बढ़ाए बिना, घरेलू रिफाइनरियों या स्थानीय खपत के हिस्से को घटाकर उसे सीधे निर्यात की ओर मोड़ दिया हो (higher export allocations)।

यह ध्यान रखना आवश्यक है कि ये स्पष्टीकरण केवल संभावित सिद्धांत हैं और उत्पादन व प्रवाह के बीच के इस अंतर का सटीक कारण अभी तक पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाया है।

डेटा विसंगति: सात या आठ सदस्य देश?

इस पूरे घटनाक्रम में एक तथ्यात्मक विसंगति भी सामने आई है। विश्लेषक इरिना स्लाव (Irina Slav) की रिपोर्टिंग (जो OilPrice.com और Investing.com पर प्रकाशित हुई) के अनुसार, 31.01 मिलियन बैरल प्रतिदिन का कोटा उन ‘आठ OPEC+ सदस्यों’ पर लागू होता है जो इस कोटे के दायरे में शामिल हैं।

दूसरी ओर, UBS के विश्लेषक जियोवानी स्टाउनोवो ने अपने वक्तव्य में इसे ‘OPEC+ group of seven’ (सात देशों का समूह) कहकर संदर्भित किया है। यह स्पष्ट नहीं है कि इस संख्यात्मक अंतर का आधार क्या है और क्या कोई विशेष सदस्य देश इन गणनाओं से बाहर रखा गया है या यह केवल वर्गीकरण का अंतर है।

बिजनेस और मार्केट पर प्रभाव

नवंबर के लिए कोटे को अपरिवर्तित रखने और वास्तविक उत्पादन के पिछड़ने के कई सीधे आर्थिक निहितार्थ हैं:

  • कड़ा वैश्विक बाजार: जब तक वास्तविक उत्पादन 31.01 मिलियन bpd के स्वीकृत कोटे के करीब नहीं पहुंचता, तब तक वैश्विक सप्लाई टाइट बनी रहेगी।
  • सप्लाई चेन जोखिम: भले ही Kpler के अनुसार 1 अक्टूबर तक के सप्ताह में तेल प्रवाह 18.5 मिलियन bpd रहा हो, लेकिन मिडिल ईस्ट के प्रमुख चोकपॉइंट्स (Strait of Hormuz, Gulf of Oman, Bab El-Mandeb) किसी भी नए संकट के प्रति बेहद संवेदनशील बने हुए हैं।
  • कागजी फैसलों की सीमा: यह स्पष्ट हो चुका है कि उत्पादन कटौती को कागजों पर वापस लेने मात्र से बाजार में भौतिक तेल की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं होती, जब तक कि लॉजिस्टिक्स और शिपिंग मार्ग पूरी तरह सुरक्षित न हों।

आगे क्या देखना होगा?

आने वाले हफ्तों में ऊर्जा बाजार के भागीदारों की नजर निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर रहेगी:

  • क्या OPEC+ का वास्तविक दैनिक उत्पादन अगस्त के 25 मिलियन बैरल के स्तर से सुधरकर 31.01 मिलियन बैरल प्रतिदिन के कोटे के करीब पहुंचता है या नहीं।
  • क्या Kpler और रायटर्स के आगामी ट्रैकिंग डेटा में Strait of Hormuz और Bab El-Mandeb के जरिए होने वाला 18.5 मिलियन बैरल प्रतिदिन का प्रवाह स्थिर रहता है।
  • क्या उत्पादक देश यह आधिकारिक जानकारी साझा करेंगे कि बढ़ते निर्यात प्रवाह का स्रोत वास्तविक उत्पादन वृद्धि है या स्टोरेज रिलीज।