हेल्थ केयर में AI के इस्तेमाल पर रॉबर्ट एफ. केनेडी जूनियर के बयानों की Claude ने की जांच

वाशिंगटन में आयोजित MAHA Action कॉन्फ्रेंस के दौरान हेल्थ एंड ह्यूमन सर्विसेज के सचिव के रूप में बोलते हुए रॉबर्ट एफ. केनेडी जूनियर ने हेल्थ केयर सेक्टर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। केनेडी का कहना है कि यदि कोई डॉक्टर बिना AI की जांच किए कोई डायग्नोसिस या प्रिस्क्रिप्शन बनाता है, तो इसे मेडिकल malpractice माना जाना चाहिए। हालांकि, उनके इस विजन और उनके द्वारा दिए गए अन्य चिकित्सा दावों को लेकर तकनीकी दुनिया और मेडिकल एक्सपर्ट्स के बीच बहस छिड़ गई है।

वाशिंगटन की इस कॉन्फ्रेंस में केनेडी ने दावा किया कि AI के माध्यम से आम लोग डॉक्टरों और वैज्ञानिकों को चुनौती देने में सक्षम होंगे और अपनी चिकित्सा देखभाल के संबंध में खुद निर्णय ले सकेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि AI तकनीक हमें ‘मेडिकल tyranny’ से मुक्त करेगी। उनके इन बयानों के बाद, एंथ्रोपिक (Anthropic) के पेड प्रोफेशनल AI असिस्टेंट ‘Claude’ के साथ-साथ OpenAI के ChatGPT, गूगल (Google) के Gemini और एलन मस्क के Grok जैसे प्रमुख AI मॉडल्स का उपयोग करके उनके दावों की समीक्षा की गई, जिसमें कई दावे तथ्यात्मक रूप से गलत या भ्रामक पाए गए।

क्या बदला है और AI टूल्स का आकलन

हेल्थ केयर सिस्टम में AI के बढ़ते प्रभाव के बीच रॉबर्ट एफ. केनेडी जूनियर के बयानों ने एक नई बहस को जन्म दिया है। जहां एक ओर एजेकील इमेनुअल (Ezekiel Emanuel) जैसे विशेषज्ञों का मानना है कि कई मामलों में डिफरेंशियल डायग्नोसिस तैयार करने में AI डॉक्टरों की तुलना में अधिक सटीक साबित हो सकता है, वहीं केनेडी के बयानों की जब Claude और अन्य AI टूल्स द्वारा जांच की गई, तो तस्वीर कुछ और ही सामने आई।

Claude ने विश्लेषण के दौरान यह स्पष्ट किया कि केनेडी द्वारा चिकित्सा और टीकों के संबंध में दिए गए कई दावे भ्रामक हैं। उदाहरण के लिए, केनेडी ने चिल्ड्रेन हेल्थ डिफेंस को दिए एक भाषण में दावा किया था कि CDC द्वारा बच्चों के लिए अनुशंसित 18 टीकों की 94 खुराकों में से केवल एक (कोविड वैक्सीन) को प्लेसबो कंट्रोल ट्रायल के अधीन किया गया था, जबकि अन्य के लिए कोई सुरक्षा अध्ययन नहीं हुआ था। AI टूल्स और फैक्ट-चेकर्स ने इन दावों को गलत या misleading करार दिया है।

मुख्य दावे और तकनीकी तथा चिकित्सीय निहितार्थ

केनेडी के बयानों और AI टूल्स की जांच से कई महत्वपूर्ण तकनीकी और व्यावसायिक पहलू सामने आते हैं:

  • डायलॉग और डायग्नोसिस: एजेकील इमेनुअल ने जर्नल ऑफ द अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन (JAMA) में सह-लेखन के जरिए यह सुझाव दिया है कि कई मामलों में AI द्वारा अकेले किया जाने वाला मेडिकल निर्णय, उन डॉक्टरों की तुलना में अक्सर बेहतर होता है जो केवल AI की सलाह लेते हैं।
  • टीकों से जुड़े दावे: केनेडी ने कोविड-19 टीकों को अब तक का ‘सबसे घातक’ बताया है, जिसके लिए उन्होंने फेडरल वैक्सीन एडवर्स इवेंट रिपोर्टिंग सिस्टम (VAERS) का हवाला दिया। इसके अलावा, उन्होंने 1955 से 1963 के बीच पोलियो वैक्सीन के इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें बंदर की कोशिकाओं में विकसित सिमियन वायरस 40 (SV40) मौजूद था।
  • भ्रामक सूचनाओं का जोखिम: Claude जैसे AI असिस्टेंट ने रेखांकित किया है कि मीजल्स, मम्स और रुबेला (MMR) वैक्सीन को लेकर फैले संदेहों के कारण टीकाकरण दरों में गिरावट आई है और इससे संक्रमण के प्रकोप (outbreaks) बढ़े हैं।

जोखिम और सीमाएं

हेल्थ केयर में AI के उपयोग को लेकर कई तरह की सीमाएं और जोखिम भी जुड़े हुए हैं। हालांकि AI टूल्स डेटा का विश्लेषण करने और डिफरेंशियल डायग्नोसिस में मदद करने में अत्यधिक सटीक हो सकते हैं, लेकिन चिकित्सा जगत में पूरी तरह से AI पर निर्भर रहना खतरनाक साबित हो सकता है। केनेडी का यह दावा कि AI के जरिए औसत लोग सीधे डॉक्टरों और वैज्ञानिकों को चुनौती दे सकते हैं, मेडिकल डेटा की जटिलता को कम आंकना है। यदि यूजर्स बिना पर्याप्त मेडिकल नॉलेज के भ्रामक AI आउटपुट पर भरोसा करते हैं, तो यह सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है।

आगे क्या देखना है

आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि स्वास्थ्य प्रशासन, विशेषकर सेंटर फॉर मेडिकेयर एंड मेडिमेड सर्विसेज (CMS) और अन्य नियामक संस्थान AI के चिकित्सा में उपयोग को किस प्रकार दिशा देते हैं। क्या डॉक्टर सचमुच अपने रोजाना के कामकाज में AI को अनिवार्य बनाएंगे या फिर AI का उपयोग केवल एक सहायक टूल के रूप में सीमित रहेगा? इसके अलावा, राजनीतिक मंचों से दिए जाने वाले बयानों और वैज्ञानिक तथ्यों के बीच की यह खाई तकनीक और चिकित्सा के भविष्य को कैसे प्रभावित करती है, इस पर इंडस्ट्री के जानकारों की पैनी नजर बनी हुई है।