आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव और आईटी सेक्टर में आ रहे बदलावों के बीच, देश की दिग्गज टेक्नोलॉजी कंपनियों में बड़ी रणनीतिक तैयारियां शुरू हो गई हैं। उपलब्ध शोध तथ्यों के अनुसार, इन्फोसिस (Infosys) अपनी इस बड़ी रणनीति के तहत अपने कर्मचारियों के एक बड़े हिस्से को स्पेशलिस्ट रोल्स में ट्रांसफर करने की योजना बना रही है। यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है जब पूरी आईटी इंडस्ट्री में कामकाज का तरीका तेजी से बदल रहा है। इस पूरी योजना का मुख्य उद्देश्य कंपनी को भविष्य की तकनीकी जरूरतों के हिसाब से तैयार करना है।
क्या बदला है?
हालिया जानकारी के अनुसार, इन्फोसिस अपनी कुल वर्कफोर्स के एक तिहाई यानी एक चौथाई से लेकर एक तिहाई हिस्से को स्पेशलिस्ट रोल्स में शिफ्ट करने की योजना पर विचार कर रही है। कंपनी के पास कुल 320,000 कर्मचारी हैं, जिन पर इस बदलाव का प्रभाव पड़ सकता है। हाल ही में एक कंपनी इवेंट में भाग लेने वाले लोगों के अनुसार, इन योजनाओं पर चर्चा की गई है।
इन्फोसिस की इस रणनीति के पीछे मुख्य वजह यह है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पारंपरिक नौकरियों और काम करने के तौर-तरीकों को तेजी से बदल रहा है। कंपनी की वार्षिक रिपोर्ट (annual report) के मुताबिक, अब काम की प्रकृति कोड क्रिएशन (code creation) से हटकर ऑर्डिनेशन (orchestration), सिस्टम सुपरविज़न (system supervision), डोमेन इंटरप्रिटेशन (domain interpretation) और आउटकम वैलिडेशन (outcome validation) की तरफ शिफ्ट हो रही है।
फ्रंटियर इंजीनियरिंग टीम और हायरिंग स्ट्रैटेजी
बदलती तकनीकी आवश्यकताओं का मुकाबला करने के लिए, इन्फोसिस एक 6,000-सदस्यीय फ्रंटियर इंजीनियरिंग टीम (frontier engineering team) बनाने की योजना बना रही है। यह टीम विशेष रूप से एडवांस्ड टेक्नोलॉजीज पर ध्यान केंद्रित करेगी और कंपनी को नए तकनीकी बदलावों के अनुकूल ढालने में मदद करेगी।
इस उद्देश्य को हासिल करने के लिए, कंपनी भारत के प्रमुख संस्थानों और अमेरिकी परिसरों (US campuses) से टैलेंट की हायरिंग कर रही है। चर्चाओं से जुड़े लोगों के अनुसार, इन्फोसिस इस प्रक्रिया में कुछ खास पदों के लिए सीधे तौर पर AI लैब्स के साथ भी टैलेंट के लिए मुकाबला कर रही है।
मुख्य लाभ और बिजनेस इम्प्लिकेशंस
इस व्यापक बदलाव के पीछे कंपनी का मुख्य उद्देश्य व्यापक AI अडॉप्टशन (AI adoption) को गहरी इंजीनियरिंग क्षमताओं, डोमेन एक्सपर्टाइज और इंटरनल ट्रेनिंग प्रोग्राम्स के साथ जोड़ना है। जब AI रूटीन कोडिंग और विकास के कामों को स्वचालित कर रहा है, तब मानव संसाधन को अधिक जटिल और रणनीतिक भूमिकाओं में लगाना जरूरी हो गया है।
इस सेक्टर इम्पैक्ट (sector impact) के तहत, आईटी इंडस्ट्री में कर्मचारियों की भूमिकाओं की परिभाषा बदल रही है। कर्मचारियों को केवल तकनीकी कोड लिखने तक सीमित रहने के बजाय सिस्टम आर्किटेक्चर, डोमेन की गहरी समझ और AI टूल्स के सही इस्तेमाल की निगरानी करने वाले विशेषज्ञ के तौर पर तैयार किया जा रहा है।
जोखिम और सीमाएं
इतने बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की भूमिका बदलना और 320,000 कर्मियों में से एक तिहाई को स्पेशलिस्ट रोल्स में ले जाना एक चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया है। हालांकि, योजनाओं के अनुसार, आंतरिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों और चुनिंदा हायरिंग के जरिए इस गैप को पाटने का प्रयास किया जा रहा है। इसके अलावा, AI लैब्स के साथ टैलेंट की दौड़ में टिके रहना और कर्मचारियों को तेजी से अपस्किल (upskill) करना भी एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।
आगे क्या देखना होगा?
भविष्य में यह देखना अहम होगा कि इन्फोसिस अपनी इस 6,000-सदस्यीय फ्रंटियर इंजीनियरिंग टीम का गठन कितनी तेजी से करती है और स्पेशलिस्ट रोल्स में कर्मचारियों के ट्रांसफर की प्रक्रिया को किस तरह अमलीजामा पहनाती है। जैसे-जैसे इंडस्ट्री में AI का प्रभाव गहरा होगा, अन्य टेक कंपनियों के लिए भी इस तरह की रणनीतिक बदलाव प्रक्रियाओं को अपनाना जरूरी हो सकता है।
