भारत के एक्ट ईस्ट पॉलिसी से सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को नया स्फूर्ति

भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी, जो एशिया‑पैसिफिक के साथ आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को गहरा करने के उद्देश्य से शुरू की गई थी, अब सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए भी एक नया मंच बन रही है। इस नीति के तहत भारत ने दक्षिण‑पूर्व एशिया के प्रमुख देशों के साथ तकनीकी साझेदारी को बढ़ावा देने के साथ-साथ घरेलू उत्पादन क्षमताओं को भी सुदृढ़ करने का लक्ष्य रखा है।

सैमिस्ट्रॉनिक उद्योग और एक्ट ईस्ट पॉलिसी

भारत की सेमीकंडक्टर उद्योग, जो अभी भी आयात पर निर्भर है, को स्वयं उत्पादन के लिए बड़े प्रोत्साहन की आवश्यकता है। IndiaBriefing के अनुसार, सरकार ने फेडरल और राज्य‑स्तरीय प्रोत्साहन, कर छूट और निवेश योजनाओं के माध्यम से इस क्षेत्र को बढ़ावा देने के कदम उठाए हैं। एक्ट ईस्ट पॉलिसी इन प्रोत्साहनों के साथ तालमेल बैठाती है, जिससे भारत को विदेशी निवेशकों के लिए आकर्षक बनाती है।

मलेशिया की बढ़ती भूमिका

मलेशिया, जो एशिया‑पैसिफिक के केंद्र में स्थित है, भारत के एक्ट ईस्ट पॉलिसी के तहत एक महत्वपूर्ण सहयोगी बन गया है। orfonline.org के विश्लेषण में बताया गया है कि मलेशिया की उभरती सेमीकंडक्टर उत्पादन क्षमताएँ और व्यापारिक नीतियाँ भारत के लिए आपूर्ति श्रृंखला में स्थिरता लाने में सहायक हैं। मलेशिया के साथ तकनीकी आदान‑प्रदान से भारतीय कंपनियों को नवीनतम निर्माण प्रक्रियाओं और उपकरणों तक पहुँच मिलती है।

असम का रणनीतिक महत्व

असम, जो भारत के पूर्वी हिस्से में स्थित है, एक्ट ईस्ट पॉलिसी के तहत एक रणनीतिक गेटवे के रूप में उभरा है। ANI News ने रिपोर्ट किया कि असम को “स्ट्रैटेजिक गेटवे टू साउथ‑ईस्ट एशिया” के रूप में वर्णित किया गया है, जहाँ से भारत अपने सेमीकंडक्टर उत्पादों को एशिया‑पैसिफिक में निर्यात कर सकता है। असम के बंदरगाहों और सड़क नेटवर्क को बेहतर बनाने के लिए योजनाएँ चल रही हैं, जिससे लॉजिस्टिक्स में सुधार होगा।

जापान के निवेश और सहयोग

जापान के प्रधानमंत्री ताकाichi का असम दौरा, जिसे Electronics For You BUSINESS और Energetica India Magazine ने कवर किया, से सेमीकंडक्टर क्षेत्र में नए निवेश की उम्मीदें बढ़ी हैं। इस दौरे के दौरान जापानी व्यवसायों ने भारतीय कंपनियों के साथ साझेदारी के प्रस्ताव रखे, विशेषकर उन्नत फोटोलिथोग्राफी और पैकेजिंग तकनीकों में। जापान की प्रौद्योगिकी और निवेश के साथ, भारतीय सेमीकंडक्टर उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने का अवसर मिलेगा।

इन्फ्रास्ट्रक्चर और प्रोत्साहन

इन्फ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में भी एक्ट ईस्ट पॉलिसी के तहत महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। ClearIAS ने I‑2SEA सबमरीन केबल सिस्टम की शुरुआत की रिपोर्ट की, जो भारत को दक्षिण‑पूर्व एशिया के साथ तेज़ डेटा कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। यह केबल सेमीकंडक्टर डिज़ाइन और उत्पादन में आवश्यक क्लाउड‑आधारित सिमुलेशन और डेटा ट्रांसफर को सक्षम करेगा।

इसके अलावा, सरकार ने सेमीकंडक्टर उत्पादन के लिए विशेष आर्थिक क्षेत्रों (SEZs) और टेक्नोलॉजी पार्कों के निर्माण की योजना बनाई है, जिससे निवेशकों को कर लाभ और नियामक सहायता मिलेगी। इन पहलों के साथ, एक्ट ईस्ट पॉलिसी भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने का मार्ग प्रशस्त करती है।

निष्कर्ष

सारांशतः, एक्ट ईस्ट पॉलिसी भारत के सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए एक बहुआयामी अवसर प्रस्तुत करती है: विदेशी निवेश, तकनीकी साझेदारी, इन्फ्रास्ट्रक्चर सुधार और क्षेत्रीय सहयोग। मलेशिया, असम और जापान जैसे साझेदारों के साथ मिलकर, भारत अपनी सेमीकंडक्टर क्षमताओं को बढ़ा सकता है और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

यह भी पढ़ें

मूल स्रोत: IndiaLaw LLP