भारत सरकार ने डिजिटल इंडिया के तहत टेलीकॉम क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक के विकास को तेज़ करने के लिए एक नया कदम उठाया है। 24 अगस्त 2024 को, डिपार्टमेंट ऑफ़ टेलीकॉम (DoT) और सेंटर फॉर डिवेलपमेंट ऑफ़ टेलीकॉम (C‑DOT) ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत दिल्ली के C‑DOT परिसर में एक एंड‑टू‑एंड ऑप्टिकल नेटवर्क टेस्ट बेड बनाया जाएगा। यह पहल स्वदेशी ऑप्टिकल कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी के परीक्षण और प्रमाणीकरण के लिए एक समर्पित मंच उपलब्ध कराएगी।
साझेदारी के प्रमुख बिंदु
सहमति के अनुसार, DoT और C‑DOT दोनों पक्षों को टेस्ट बेड के निर्माण, संचालन और रख‑रखाव में बराबर हिस्सा मिलेगा। C‑DOT को प्रौद्योगिकी और प्रयोगशाला सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँगी, जबकि DoT को नेटवर्क के लिए आवश्यक नियामक समर्थन और नीति दिशा-निर्देश मिलेंगे। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य है:
- स्वदेशी ऑप्टिकल फाइबर, मॉड्यूलेशन स्कीम और नेटवर्क प्रोटोकॉल का परीक्षण करना।
- भारत के टेलीकॉम इन्फ्रास्ट्रक्चर में विदेशी तकनीक पर निर्भरता घटाना।
- देश के भीतर निर्मित उपकरणों के लिए प्रमाणन प्रक्रिया को तेज़ करना।
इस पहल के तहत, C‑DOT को एक पूर्ण रूप से कार्यशील ऑप्टिकल नेटवर्क मिलेगा, जो 5G और भविष्य के 6G नेटवर्क के लिए आवश्यक उच्च बैंडविड्थ और कम विलंबता (low‑latency) को संभाल सके।
क्यों ज़रूरी है यह कदम?
भारत की टेलीकॉम उद्योग में अभी भी कई तकनीकी खामियाँ हैं, खासकर ऑप्टिकल नेटवर्किंग के क्षेत्र में। विदेशी उपकरणों पर निर्भरता के कारण लागत बढ़ती है और तकनीकी स्वायत्तता सीमित हो जाती है। C‑DOT में यह टेस्ट बेड स्वदेशी उत्पादकों को अपने उपकरणों का वास्तविक नेटवर्क वातावरण में परीक्षण करने का अवसर देगा, जिससे वे वैश्विक मानकों के अनुरूप उत्पाद बना सकें।
इसके अलावा, यह पहल राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। ऑप्टिकल नेटवर्किंग में उपयोग होने वाले डेटा ट्रांसमिशन प्रोटोकॉल और एन्क्रिप्शन विधियाँ संवेदनशील हो सकती हैं। स्वदेशी परीक्षण से यह सुनिश्चित होगा कि भारतीय नेटवर्क सुरक्षित और विश्वसनीय हैं।
भविष्य के लिए क्या अर्थ रखता है?
इस टेस्ट बेड के माध्यम से, भारतीय टेलीकॉम कंपनियाँ और स्टार्ट‑अप्स अपने प्रोटोटाइप को तेज़ी से परख सकेंगी, जिससे नवाचार की गति बढ़ेगी। साथ ही, यह परियोजना विदेशी निवेशकों के लिए भी एक संकेत हो सकता है कि भारत में टेलीकॉम क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक का विकास हो रहा है, जिससे निवेश के नए अवसर खुल सकते हैं।
इस पहल को लेकर कुछ उद्योग विशेषज्ञों ने कहा है कि यदि इस टेस्ट बेड का सही ढंग से उपयोग किया जाए तो भारत 5G के बाद 6G नेटवर्क के लिए भी तैयार हो सकता है, क्योंकि ऑप्टिकल नेटवर्किंग 6G की मुख्य आधारशिला होगी।
समापन
DoT और C‑DOT की यह साझेदारी भारत के टेलीकॉम क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह कदम न केवल लागत घटाने और सुरक्षा बढ़ाने में मदद करेगा, बल्कि भारत को वैश्विक टेलीकॉम मानकों के अनुरूप बनाने के मार्ग पर भी आगे बढ़ाएगा।
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मूल स्रोत: Swarajya